ग्वालियर में गुमशुदा तोते ‘शकुंतला’ की तलाश: ढूंढने वाले को मिलेगा 50 हजार का इनाम, गली-गली में हो रही मुनादी

ग्वालियर (मध्य प्रदेश): प्रायः किसी व्यक्ति की कीमती वस्तु, गहने या दस्तावेज गुम हो जाने पर उसे वापस पाने के लिए लोग हरसंभव प्रयास करते हैं और ढूंढने वाले को पुरस्कार देने का ऐलान करते हैं।
लेकिन इन दिनों ग्वालियर शहर की सड़कों पर दौड़ रहा एक ई-रिक्शा और उस पर लगा बड़ा बैनर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। इस बैनर पर किसी वस्तु या इंसान नहीं, बल्कि एक गुमशुदा तोते को ढूंढने की भावुक अपील लिखी हुई है, वह भी पूरे ₹50,000 के नकद इनाम के साथ।
🦜 5 दिन पहले खुली खिड़की से उड़ गई ‘शकुंतला’, परिवार में छाया गहरा शोक
ग्वालियर के अलकापुरी इलाके में रहने वाले अनिल ओझा का परिवार इन दिनों बेहद दुख और मानसिक तनाव के दौर से गुजर रहा है।
उनके परिवार का एक बेहद प्यारा सदस्य कहीं गुम हो गया है। यह सदस्य है अनिल ओझा के परिवार का पालतू मिट्ठू यानी ‘शकुंतला’, जो 5 दिन पूर्व सोमवार को अचानक घर की खुली खिड़की से कहीं उड़ गई थी। उस दिन के बाद से ही पूरा परिवार उसके बिना व्यथित है और अब उसे वापस पाने के लिए ग्वालियर के कोने-कोने में सघन खोजबीन अभियान चला रहा है।
📢 गली-गली घूम रहा ई-रिक्शा, तोते की तस्वीर और संपर्क नंबर के साथ कराई जा रही मुनादी
अनिल ओझा ने अपने प्यारे तोते को सकुशल वापस लाने वाले व्यक्ति के लिए ₹50,000 के इनाम की घोषणा की है।
इसकी मुनादी ग्वालियर की गली-गली और मोहल्लों में कराई जा रही है। इसके लिए उन्होंने एक विशेष ई-रिक्शा किराए पर लिया है, जिस पर तोते ‘शकुंतला’ की स्पष्ट तस्वीर, उसकी विशेषताएं और इनाम की राशि के साथ अपना मोबाइल नंबर लिखवाया है। यह ई-रिक्शा दिन भर शहर भर में घूमकर तोते की जानकारी का प्रचार-प्रसार कर रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है।
🏠 एक साल पहले परिवार का सदस्य बनी थी ‘शकुंतला’, जाने के बाद से उदास हैं दादी और पोती
इस संबंध में अनिल ओझा से संपर्क करने पर उन्होंने बताया कि, “शकुंतला को हम लगभग एक साल पहले अपने घर लाए थे। उसके आने के बाद से पूरे घर में एक अलग ही रौनक और खुशी का माहौल रहता था। विशेष रूप से मेरी माता जी और बेटी का उससे गहरा लगाव हो गया था। वह केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि हमारे परिवार का अभिन्न सदस्य बन चुकी थी। लेकिन जब से वह उड़कर गई है, तब से ही मेरी मां और बेटी दोनों बेहद उदास और हताश हैं।”
🍽️ तोते के गम में दादी-पोती ने छोड़ा खाना, माथे पर लाल व सिलेटी रंग के तिलक से होगी पहचान
अनिल ओझा भावुक होते हुए कहते हैं कि, “तोते के चले जाने के बाद से मेरी मां और बेटी के गले से भोजन का एक निवाला तक नहीं उतर रहा है। ऐसी स्थिति में हमारे लिए यह 50 हजार रुपये कोई मायने नहीं रखते। अगर हमारा तोता हमें वापस मिल जाता है, तो घर में फिर से खुशियां लौट आएंगी।”
अनिल ने तोते की विशिष्ट पहचान बताते हुए कहा कि, “हमारा तोता सामान्य हरे रंग का है, लेकिन उसके माथे पर प्राकृतिक रूप से सिलेटी और लाल रंग का तिलक बना हुआ है, जिससे उसकी पहचान बेहद आसानी से की जा सकती है। जो भी सज्जन इसे ढूंढकर लाएंगे, उन्हें सम्मानपूर्वक इनाम की पूरी राशि प्रदान की जाएगी।”






