BAPS Swaminarayan Jabalpur: एफिल टावर विवाद से लेकर जबलपुर में संस्कार शिक्षा तक; जानें BAPS स्वामीनारायण संस्था का ‘चलो बनें आदर्श’ प्रोग्राम

जबलपुर। हाल ही में पेरिस के एफिल टावर पर महिला कर्मचारियों को एक दिन की अचानक छुट्टी दिए जाने और बीएपीएस (BAPS) स्वामीनारायण संस्था के संतों के आगमन की घटना पूरे विश्व में चर्चा का विषय बनी थी। मीडिया में यह बात सामने आई थी कि संस्था के संत महिलाओं से संयम व दूरी के नियमों का पालन करते हैं। हालांकि, यह संस्था केवल धार्मिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज निर्माण और सामाजिक जागरूकता में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। इसी कड़ी में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था ने जबलपुर में 2000 से अधिक शिक्षकों को एक विशेष प्रशिक्षण दिया है, ताकि बच्चों को मोबाइल, टीवी, वीडियो गेम और वेब सीरीज के घातक प्रभावों से सुरक्षित रखा जा सके।
📱 ‘चलो बनें आदर्श’ कार्यक्रम के जरिए बच्चों को किया जा रहा जागरूक: किताबी ज्ञान के साथ जरूरी हैं संस्कार
दरअसल, जबलपुर में बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था द्वारा ‘चलो बनें आदर्श’ नामक विशेष जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से स्क्रीन टाइम, वीडियो गेम और वेब सीरीज की लत को लेकर विद्यार्थियों और शिक्षकों को जागरूक किया जा रहा है। आयोजकों ने बताया कि डिजिटल तकनीकों ने बच्चों की दिनचर्या, पढ़ाई, व्यवहार और मानसिक सोच को गहराई से प्रभावित किया है। ऐसे दौर में बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन्हें सही संस्कार, नैतिक मूल्य और जीवन शैली की शिक्षा देना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।
🎓 सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर में 2000 शिक्षकों की ट्रेनिंग: ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन से बताए समाधान
अभियान के तहत जबलपुर के सरकारी और निजी व कॉन्वेंट स्कूलों के करीब 2000 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो घंटे के इस सत्र में शिक्षकों को बच्चों के बदलते व्यवहार, मानसिक तनाव और नई डिजिटल चुनौतियों के विषय में ऑडियो-विजुअल प्रेजेंटेशन के जरिए विस्तार से जानकारी दी गई। कार्यक्रम में जबलपुर संभाग के संयुक्त शिक्षा संचालक घनश्याम सोनी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि बदले हुए सामाजिक परिवेश में बिना दंड दिए बच्चों को अनुशासित करना और पढ़ाना एक कला है, जिसके लिए शिक्षकों को खुद को अपडेट रखना होगा।
🌍 केवल शिक्षित होना काफी नहीं, संस्कार भी जरूरी: महंत ज्ञान नयन ने दिया द्वितीय विश्व युद्ध का उदाहरण
कार्यक्रम में बीएपीएस के वरिष्ठ संत महंत ज्ञान नयन ने स्क्रीन एडिक्शन के बच्चों पर पड़ रहे नकारात्मक प्रभावों को रेखांकित किया।
उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध का ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौर में कई उच्च शिक्षित लोग भी ऐसे अमानवीय कृत्यों में शामिल हुए, जो मानवता के लिए कलंक थे। इससे स्पष्ट है कि केवल साक्षर या शिक्षित हो जाना काफी नहीं है, बल्कि शिक्षा के साथ मानवीय मूल्यों और नैतिक संस्कारों का विकास बेहद अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि संस्था ने ऑडियो-विजुअल फिल्में तैयार की हैं, जिनका उपयोग स्कूलों में बच्चों की काउंसलिंग के लिए किया जा रहा है।
👨👩👧👦 बच्चों के पालन-पोषण में माता-पिता की भूमिका अहम: BAPS प्रमुख महंत स्वामी महाराज का जबलपुर से खास नाता
प्रशिक्षण में शामिल निजी स्कूलों की शिक्षिकाओं ने माना कि मोबाइल और इंटरनेट की लत एक गंभीर समस्या है, जिसके लिए अभिभावकों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है।
इसी दौरान स्वामी ज्ञान नयन ने एफिल टावर से जुड़े भ्रम पर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि संस्था के संत व्यक्तिगत साधना और नियमों के तहत महिलाओं से दूरी रखते हैं, लेकिन संस्था महिलाओं का सर्वोच्च सम्मान करती है और उनके उत्थान के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रम चलाती है। उल्लेखनीय है कि बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था के वर्तमान वैश्विक प्रमुख महंत स्वामी महाराज का जन्म जबलपुर में ही हुआ था और उनकी प्रारंभिक शिक्षा क्राइस्ट चर्च स्कूल, जबलपुर से हुई थी। इसी आत्मिक जुड़ाव के कारण जबलपुर में इस संस्कार अभियान को वृहद स्तर पर चलाया जा रहा है।

