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रांची के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में गूंजा ‘हर-हर महादेव’: सावन की पहली सोमवारी पर तड़के 3:30 बजे से उमड़ा आस्था का जनसैलाब

रांची (झारखंड): सावन का पावन मास भगवान आशुतोष का अत्यंत प्रिय महीना माना जाता है, जिसका इंतजार वर्षभर शिवभक्तों को रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन मास में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक एवं भक्तिभाव से पूजन करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी अटूट आस्था के साथ सावन की प्रथम सोमवारी पर राजधानी रांची के समस्त प्रमुख शिवालयों में तड़के से ही श्रद्धालुओं का असीम जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहर के ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर परिसर में “बोल बम”, “हर-हर महादेव” और “जय बाबा भोले” के गगनभेदी जयघोष से संपूर्ण अंचल शिवमय एवं भक्तिमय हो उठा। पहाड़ी मंदिर प्रांगण में भक्तों का आगमन सुबह 3:30 बजे से ही प्रारंभ हो गया था।

🛕 सुबह 4 बजे से प्रारंभ हुआ दर्शन और जलार्पण, बेलपत्र-गंगाजल लेकर कतारों में खड़े रहे भक्त

पहाड़ी मंदिर विकास समिति एवं प्रशासन द्वारा सुबह 4 बजे से ही भक्तों के लिए दर्शन एवं जलार्पण की व्यवस्था प्रारंभ कर दी गई थी।

इसके उपरांत दिनभर भक्तों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलीं। महिलाएं, पुरुष, युवा, बच्चे एवं बुजुर्ग सभी पूर्ण उत्साह के साथ बाबा भोलेनाथ के दर्शन हेतु पहुंचे। श्रद्धालु अपने साथ पवित्र गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा, पुष्प एवं पूजन सामग्री लेकर कतारबद्ध हुए और विधि-विधान से देवाधिदेव महादेव की पूजा-अर्चना संपन्न की।

🤝 मंदिर समिति, आरएसएस (RSS) और आदिवासी-पाहन समाज ने संभाली व्यवस्थाएं

श्रद्धालुओं की सुगम आवाजाही एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन, पहाड़ी मंदिर विकास समिति, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के स्वयंसेवकों, स्थानीय आदिवासी समाज तथा पाहन समाज के प्रतिनिधियों ने परस्पर समन्वय बनाकर व्यापक व्यवस्थाएं कीं।

मंदिर परिसर में प्रवेश एवं निकास (Entry & Exit) हेतु पृथक-पृथक मार्गों का निर्माण किया गया था, जिससे परिसर के भीतर अत्यधिक भीड़ का दबाव निर्मित न हो सके।

🚶‍♀️ महिलाओं और पुरुषों के लिए बनाई गईं अलग-अलग कतारें, अनुशासित तरीके से हुआ पूजन

गर्भगृह के समीप श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु महिलाओं एवं पुरुषों के लिए पृथक-पृथक कतारबद्ध व्यवस्था लागू की गई थी।

मुख्य गर्भगृह में जलार्पण के दौरान सर्वप्रथम महिला श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जा रहा था, तत्पश्चात पुरुष भक्तों को जलाभिषेक का अवसर प्राप्त हुआ। इससे संपूर्ण व्यवस्था अत्यंत अनुशासित, सुचारू एवं व्यवस्थित बनी रही। श्रद्धालु शांतिपूर्ण ढंग से सीढ़ियां चढ़कर मंदिर पहुंचे। स्वयंसेवक निरंतर लाउडस्पीकर के माध्यम से श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन करते रहे।

🚰 महाकाल मंदिर सहित अन्य शिवालयों में अर्घा सिस्टम से कराया गया जलाभिषेक

पहाड़ी मंदिर के अतिरिक्त राजधानी रांची के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर तथा अन्य स्थानीय शिवालयों में भी सावन की पहली सोमवारी पर विशेष अनुष्ठान संपन्न किए गए।

अनेक मंदिरों में भीड़ प्रबंधन के उद्देश्य से अर्घा (Pipe/Channel System) के माध्यम से जलाभिषेक की व्यवस्था की गई, ताकि अधिक से अधिक संख्या में आए शिवभक्त सुगमतापूर्वक और बिना किसी असुविधा के भगवान शिव का अभिषेक कर सकें।

🛡️ सीसीटीवी (CCTV) और वालंटियर्स से रखी गई पैनी नजर, शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ जलाभिषेक

सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस-प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद दिखाई दिया। मंदिर परिसर तथा आसपास के संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

महिला पुलिसकर्मियों के साथ-साथ पुरुष बटालियन के जवान भी चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का जिम्मा संभालते नजर आए। संपूर्ण परिसर की निगरानी सीसीटीवी कैमरों द्वारा की जा रही थी। वालंटियर्स कतारों को सुव्यवस्थित करने और बुजुर्गों व असहायों को सहायता प्रदान करने में जुटे रहे। इस प्रकार भक्ति, अनुशासन और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था के बीच हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

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