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छत्तीसगढ़

कांकेर में भालू-तेंदुए का आतंक: रिहायशी इलाकों में पहुंचे जंगली जानवर, हमले में 2 की मौत; दहशत में ग्रामीण

कांकेर (छत्तीसगढ़): जिले में जंगली जानवरों की निरंतर बढ़ती आवाजाही ने ग्रामीण अंचलों के साथ-साथ शहर से लगे रिहायशी इलाकों में निवास करने वाले नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। जंगल और पहाड़ी श्रृंखलाओं से घिरे कांकेर जिले में भालू, तेंदुए सहित अन्य वन्यजीव लगातार आबादी वाले क्षेत्रों के करीब पहुंच रहे हैं। इससे जनमानस में भय का वातावरण निर्मित हो गया है और स्थानीय नागरिकों द्वारा वन विभाग से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की पुरजोर मांग की जा रही है।

😡 भालू के हमले से 2 ग्रामीणों की मौत के बाद फूटा आक्रोश, संवेदनशील इलाकों में निगरानी की मांग

हाल ही के दिनों में भालू के हिंसक हमले में दो ग्रामीणों की असमय मृत्यु और एक व्यक्ति के गंभीर रूप से घायल होने के उपरांत स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर पहुंच गया है।

ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वन्यजीवों की सघन आबादी वाले क्षेत्रों में उनकी आबादी की ओर बढ़ती आवाजाही को नियंत्रित करने और संवेदनशील घोषित क्षेत्रों में नियमित गश्त व निगरानी बढ़ाने की नितांत आवश्यकता है।

🌲 घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा है कांकेर, भोजन-पानी की तलाश में बाहर आ रहे वन्यजीव

भौगोलिक दृष्टि से कांकेर जिला विस्तृत वन क्षेत्रों और दुर्गम पहाड़ियों से आच्छादित है, जो भालू, तेंदुए तथा अन्य वन्यप्राणियों का प्राकृतिक आवास स्थल है।

जंगल से सटे ग्रामीण इलाकों में वन्यजीवों की उपस्थिति पूर्व में भी दर्ज की जाती रही है, किंतु वर्तमान समय में इनके सीधे शहर और घनी आबादी वाले मोहल्लों तक पहुंचने की घटनाएं अत्यधिक बढ़ गई हैं।

🗣️ मुख्य वन संरक्षक विवेकानंद झा का वक्तव्य: हैबिटेट डेवलपमेंट पर किया जा रहा कार्य

कांकेर वन वृत्त के मुख्य वन संरक्षक (CCF) विवेकानंद झा के अनुसार, जिले में वन्यजीवों की संख्या में उत्साहजनक वृद्धि हुई है।

जंगलों के संवर्धन के साथ ही वन्यप्राणियों की संख्या बढ़ी है, जिसके कारण भोजन और पेयजल की खोज में जानवर कई बार प्राकृतिक रहवास से निकलकर गांवों और शहरी बस्तियों की ओर रुख कर लेते हैं। वन विभाग द्वारा वन्यजीवों को जंगल के भीतर ही पर्याप्त भोजन-पानी उपलब्ध कराने हेतु ‘हैबिटेट डेवलपमेंट’ योजना के तहत फलदार पौधे लगाने और जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है।

⚠️ मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीछे जंगलों में मानवीय हस्तक्षेप और अतिक्रमण मुख्य वजह

वन विभाग के विश्लेषणात्मक आकलन के अनुसार, इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के कई प्रमुख कारण हैं।

इनमें वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, जंगलों का विखंडन, वन्यप्राणियों की बढ़ती संख्या तथा ग्रामीणों का आजीविका व लघु वनोपज संग्रहण हेतु जंगलों में अत्यधिक प्रवेश शामिल है। प्राकृतिक आवास में मानवीय हस्तक्षेप बढ़ने से वन्यजीवों का विचरण चक्र प्रभावित हुआ है, जिससे वे आबादी वाले क्षेत्रों की ओर पलायन कर रहे हैं।

🐻 कांकेर शहर के रामनगर, शीतलापारा और नरहरपुर में भालू की आवाजाही, कुएं में गिरे वन्यजीव

कांकेर शहर के रामनगर, शीतलापारा, राजापारा और संजय नगर जैसे मोहल्लों में शाम ढलते ही भालुओं की चहलकदमी देखी जा रही है।

उधर, नरहरपुर क्षेत्र के मरकाटोला में मादा भालू के हमले में दो लोगों की जान चली गई। इसके अतिरिक्त कुसुमपानी गांव में भालू का शावक कुएं में गिर गया था जिसे वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू किया, जबकि साईंमुंडा गांव में कुएं में गिरे एक तेंदुए की असमय मौत हो गई।

📢 वन विभाग ने जारी किया अलर्ट: अकेले जंगल न जाएं, समूहों में करें आवाजाही

मुख्य वन संरक्षक विवेकानंद झा ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा है कि, “संवेदनशील क्षेत्रों के निवासी अत्यधिक सतर्कता बरतें। अनावश्यक रूप से जंगलों की ओर न जाएं और जाने पर समूह में ही निकलें। वन्यजीव दिखाई देने पर सुरक्षित दूरी बनाए रखें और तुरंत वन विभाग को सूचित करें।”

🪓 ट्रैंक्विलाइजर गन की अनुपलब्धता पर उठे सवाल, स्थानीय निवासियों ने व्यवस्था पर जताई नाराजगी

लगातार घट रही हिंसक घटनाओं के बीच स्थानीय युवाओं और जनप्रतिनिधियों ने वन विभाग के रेस्क्यू तंत्र पर सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय निवासी अजय भासवानी का कहना है कि जिस भालू के हमले में दो लोगों की जान गई, उसे ट्रेंक्विलाइज (बेशुद्ध) करने के लिए जिला मुख्यालय में समय पर ‘ट्रैंक्विलाइजर गन’ तक उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने मांग की है कि केवल सलाह देने के बजाय वन विभाग को आपातकालीन रेस्क्यू टीमों और आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित करनी चाहिए।

🛡️ संवेदनशील क्षेत्रों की मैपिंग और तत्काल रेस्क्यू टीम तैनात करने की मांग

कांकेर में गहराते मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि जिन क्षेत्रों में वन्यप्राणियों की आमद अधिक है, उन्हें तत्काल रेड-ज़ोन/संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर चौबीसों घंटे पेट्रोलिंग और रेस्क्यू वाहन तैनात किए जाएं ताकि किसी भी अप्रिय घटना को समय रहते रोका जा सके।

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