झारखंड में मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का बड़ा अभियान: 63 लाख से अधिक वोटरों को नोटिस जारी

रांची (झारखंड): राज्य में संचालित मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत चुनाव आयोग ने 63 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस जारी कर जवाब तलब करने की प्रक्रिया शुरू की है।
ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम न होने, अशुद्धियों, नो-मैपिंग अथवा डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्री (DSE) की श्रेणी में आने वाले मतदाताओं को 24 अगस्त से अपने वैध साक्ष्यों के साथ दावा प्रस्तुत करना होगा। इससे पूर्व 22 अगस्त से मतदान केंद्रों पर दो दिवसीय विशेष कैंप का आयोजन कर ऐसे मतदाताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान का प्रयास किया जा रहा है।
📊 45.55 लाख वोटरों के रिकॉर्ड में तार्किक विसंगति, 14 लाख से अधिक नो-मैपिंग श्रेणी में
मतदाता श्रेणियों और आंकड़ों का संपूर्ण विवरण:
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कुल ड्राफ्ट मतदाता संख्या: वर्तमान मतदाता सूची के ड्राफ्ट पब्लिकेशन में कुल मतदाताओं की संख्या 2,21,01,249 (2.21 करोड़) है।
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नोटिस पाने वाले कुल मतदाता: विभिन्न श्रेणियों के तहत निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) स्तर से कुल 63,24,116 मतदाताओं को नोटिस भेजे जा रहे हैं।
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तार्किक विसंगति (Logical Discrepancy): सबसे अधिक 45,55,227 मतदाताओं के रिकॉर्ड में नाम, माता-पिता के नाम, जन्म तिथि या दोहरी प्रविष्टि संबंधी विसंगतियां पाई गई हैं।
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नो-मैपिंग श्रेणी: 14,03,205 मतदाताओं का भौतिक सत्यापन नो-मैपिंग आधार पर किया जाएगा।
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डेमोग्राफिकल सिमिलर एंट्री (DSE): समान नाम व पहचान वाले 3,65,684 मतदाताओं का सत्यापन सुनिश्चित किया जाएगा।
📈 अन्य राज्यों की तुलना में झारखंड में ASDDO मतदाताओं का प्रतिशत
देश के प्रमुख राज्यों में ASDDO श्रेणी के मतदाताओं का तुलनात्मक अनुपात:
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दिल्ली: 33.00%
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तेलंगाना: 21.70%
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महाराष्ट्र: 21.25%
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कर्नाटक: 19.60%
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झारखंड: 16.50%
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हरियाणा: 16.39%
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चंडीगढ़: 12.80%
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आंध्र प्रदेश: 10.80%
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सिक्किम: 8.00%
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मेघालय: 7.68%
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मणिपुर: 7.50%
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ओडिशा: 6.02%
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मिजोरम: 5.20%
(नोट: देश के 12 राज्यों में चल रहे अभियान में झारखंड का प्रतिशत 16.50% है, जो देश के कई राज्यों से अधिक है।)
📸 बीएलओ घर-घर जाकर देंगे नोटिस, साथ में ली जाएगी मतदाता की लाइव तस्वीर
पारदर्शिता और नोटिस तामील की प्रक्रिया:
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घर-घर सत्यापन: सभी नोटिस बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) के माध्यम से वितरित किए जाएंगे।
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तस्वीर खींचना अनिवार्य: नोटिस देते समय बीएलओ संबंधित मतदाता के साथ अनिवार्य रूप से फोटो खींचेंगे ताकि वास्तविक तामीली की पुष्टि हो सके।
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ईआरओ स्तर पर सुनवाई: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार के अनुसार, किसी भी मतदाता का नाम बिना विधिसम्मत सुनवाई और सक्षम प्राधिकारी के आदेश के नहीं हटाया जाएगा। प्रत्येक मामले का निष्पक्ष व पारदर्शी निस्तारण आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप होगा।
⏳ साक्ष्य प्रस्तुत करने के लिए मिलेगा 1 सप्ताह का समय, दूसरी नोटिस का भी प्रावधान
दस्तावेज प्रस्तुति और अग्रिम प्रक्रिया:
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उपस्थिति की अनिवार्यता: नोटिस प्राप्त होने के बाद संबंधित मतदाता को 7 दिनों (एक सप्ताह) के भीतर आवश्यक साक्ष्यों के साथ सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (AERO) के समक्ष उपस्थित होना होगा।
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दूसरा नोटिस: यदि मतदाता पहली नोटिस पर उपस्थित नहीं होते हैं, तो उन्हें दूसरा नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद नियमानुसार अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
👥 विशेष कैंपों में उमड़ी भीड़, फॉर्म-6 और फॉर्म-8 भरने में जुटे मतदाता
मतदान केंद्रों की जमीनी स्थिति और आयोग की अपील:
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कैंपों में सक्रियता: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने (फॉर्म-6) तथा संशोधन (फॉर्म-8) कराने के लिए मतदान केंद्रों पर लोगों की कतारें देखने को मिलीं।
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पते व वार्ड परिवर्तन की समस्याएं: कई मतदाताओं ने आवासीय पता बदलने, नाम की स्पेलिंग में त्रुटि और परिवार के सदस्यों के अलग-अलग वार्ड में दर्ज होने की शिकायतें दर्ज कराईं।
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18 वर्ष की आयु सीमा: चुनाव आयोग ने आगामी अर्हता तिथि (1 अक्टूबर 2026) को 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले सभी पात्र नागरिकों से मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए आगे आने की अपील की है।





