रायसेन में आयुष्मान भारत योजना में फर्जीवाड़ा: हेल्थ कैंप के नाम पर 17 बुजुर्गों को भर्ती कर लाखों का क्लेम; कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश

रायसेन (मध्य प्रदेश): जिले के औद्योगिक क्षेत्र मंडीदीप में आयुष्मान भारत योजना के तहत गंभीर वित्तीय अनियमितता और फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है।
मंडीदीप स्थित सार्थक अस्पताल पर आरोप लगा है कि अस्पताल प्रबंधन ने ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य शिविर (हेल्थ कैंप) का आयोजन कर 17 बुजुर्गों को बेहतर उपचार का झांसा दिया और उन्हें अस्पताल लाकर सात से आठ दिनों तक भर्ती रखा। बुजुर्गों का आरोप है कि उन्हें समुचित इलाज नहीं दिया गया, लेकिन उनके आयुष्मान कार्ड से भारी-भरकम राशि का क्लेम पास करा लिया गया। शिकायत सामने आने के उपरांत जिला प्रशासन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू करा दी है।
🚐 गांव में लगाया हेल्थ कैंप, गाड़ी में बैठाकर अस्पताल ले गए बुजुर्ग
मरीजों को लाने का तरीका और कैंप की पृष्ठभूमि:
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गांवों में शिविर: अस्पताल प्रबंधन की ओर से 15 जुलाई को ग्राम सांचेत और उसके अगले दिन ग्राम विशनखेड़ी में स्वास्थ्य शिविर लगाया गया था।
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बेहतर इलाज का झांसा: कैंप के दौरान ब्लड प्रेशर, शुगर, सांस और घुटनों के पुराने दर्द से पीड़ित बुजुर्ग ग्रामीणों की प्राथमिक जांच की गई और उन्हें उच्च स्तरीय इलाज का भरोसा दिलाया गया।
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अस्पताल में शिफ्टिंग: जांच के बाद अस्पताल की गाड़ी भेजकर दोनों गांवों से 17 बुजुर्ग मरीजों को सीधे मंडीदीप के सार्थक अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया।
🛏️ 7 से 8 दिनों तक भर्ती रखा: इलाज के नाम पर सिर्फ ड्रिप लगाने का आरोप
मरीजों के साथ हुआ व्यवहार और आपबीती:
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इलाज के नाम पर खानापूर्ति: पीड़ित बुजुर्गों का कहना है कि अस्पताल में कई दिनों तक भर्ती रखने के बावजूद उनकी मुख्य बीमारियों का कोई ठोस उपचार नहीं किया गया। केवल एक-दो बार ड्रिप चढ़ाकर औपचारिकता पूरी की गई।
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छुट्टी मांगने पर रोक: कई बुजुर्गों ने जब स्थिति में सुधार न होने पर घर जाने की इच्छा जताई, तो उन्हें डिस्चार्ज करने से मना कर दिया गया और अस्पताल परिसर में ही रोके रखा गया।
💳 इलाज कम, आयुष्मान कार्ड से लाखों का क्लेम: बिना बताए निकाली राशि
वित्तीय हेराफेरी के गंभीर आरोप:
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लाखों का क्लेम: अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद जब मरीजों को हकीकत समझ आई, तो उन्होंने प्रशासन से शिकायत दर्ज कराई। आरोप है कि उनके आयुष्मान कार्ड से प्रति मरीज मोटी रकम का क्लेम किया गया।
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जानकारी छिपाने का आरोप: मरीजों को इस बात की कोई अधिकृत जानकारी या रसीद नहीं दी गई कि उनके कार्ड से किस बीमारी के पैकेज के तहत कितनी राशि क्लेम की गई है।
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कोई स्वास्थ्य लाभ नहीं: पीड़ितों का कहना है कि जिस परेशानी के लिए उन्हें लाया गया था, वह जस की तस बनी हुई है।
🗣️ पीड़ितों ने सुनाई दास्तान: ‘बीमारी ठीक नहीं हुई, केवल कागजी प्रक्रिया पूरी की’
पीड़ित मरीजों के बयान:
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भगवती बाई: पीड़िता भगवती बाई ने बताया कि घुटनों के दर्द के नाम पर उन्हें करीब आठ दिनों तक वार्ड में रखा गया, लेकिन दर्द में रत्ती भर भी आराम नहीं मिला।
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मातादीन: सांस की बीमारी से पीड़ित बुजुर्ग मातादीन ने आरोप लगाया कि गंभीर समस्या होने के बावजूद कोई स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं आया, बस औपचारिकता पूरी कर आयुष्मान कार्ड से पैसे निकाल लिए गए।
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कन्हैया लाल मीणा: पीड़ित कन्हैया लाल ने अस्पताल प्रबंधन पर खुलेआम मनमानी और गरीबों के नाम पर फर्जीवाड़ा करने के आरोप लगाए हैं।
⚖️ कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश: दोषी पाए जाने पर रद्द होगा अस्पताल का लाइसेंस
प्रशासनिक रुख और जांच के बिंदु:
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लाइसेंस निरस्त करने की मांग: पीड़ितों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि ऐसे निजी अस्पतालों के विरुद्ध सख्त कदम उठाते हुए उनका पंजीयन और आयुष्मान पैनल से संबद्धता रद्द की जाए।
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कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा का निर्देश: रायसेन कलेक्टर ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच कमेटी गठित कर दी है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यदि अस्पताल प्रबंधन पर लगे आरोप सही साबित होते हैं, तो धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जांच का फोकस: जांच दल यह पड़ताल कर रहा है कि हेल्थ कैंप के संचालन के नियम क्या थे, मरीजों को किस मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत इतने दिन भर्ती रखा गया और सॉफ्टवेयर में कौन से मेडिकल प्रोसीजर दर्ज कर क्लेम हासिल किया गया।





