सज्जन कुमार की शोक सभा को लेकर पंजाब में गरमाई राजनीति: BJP प्रवक्ता आर.पी. सिंह का ‘आप’ पर तीखा हमला

1984 के सिख विरोधी दंगों के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निधन के बाद आयोजित शोक सभा में राजनेताओं की मौजूदगी को लेकर पंजाब का सियासी पारा चढ़ गया है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने सोशल मीडिया के माध्यम से आम आदमी पार्टी (AAP) पर सीधा हमला बोलते हुए उसके दोहरे रवैये पर कड़े सवाल खड़े किए हैं।
⚖️ ‘भाजपा सांसदों को मिल चुकी है फटकार’: आप के विरोध प्रदर्शन पर उठाए सवाल
भाजपा की कार्रवाई और आम आदमी पार्टी का दोहरा मापदंड:
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भाजपा की त्वरित कार्रवाई: आर.पी. सिंह ने स्पष्ट किया कि सज्जन कुमार की शोक सभा में शामिल होने वाले भाजपा के तीन सांसदों को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा पहले ही उनके इस कदम के लिए कड़ी फटकार लगाई जा चुकी है।
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पंजाब में आप का प्रदर्शन: उन्होंने कहा कि इसके बावजूद आम आदमी पार्टी पूरे पंजाब में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक विरोध प्रदर्शन कर रही है।
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समान मापदंड की मांग: आर.पी. सिंह ने सवाल उठाया कि क्या आम आदमी पार्टी अपने नेताओं की जवाबदेही तय करने के लिए भी यही नैतिक मापदंड अपनाएगी?
❓ ‘क्या केजरीवाल में महाबल मिश्रा से सवाल करने की हिम्मत है?’: आर.पी. सिंह का सीधा वार
आम आदमी पार्टी के नेता की मौजूदगी पर घेरा:
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महाबल मिश्रा की उपस्थिति: भाजपा प्रवक्ता ने तथ्य सामने रखते हुए कहा कि 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के दोषी सज्जन कुमार की शोक सभा में पूर्व सांसद और वर्तमान ‘आप’ नेता महाबल मिश्रा भी शामिल हुए थे।
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केजरीवाल से सवाल: उन्होंने पूछा कि क्या अरविंद केजरीवाल में इतनी राजनीतिक हिम्मत है कि वे अपनी ही पार्टी के नेता महाबल मिश्रा से इस मामले पर स्पष्टीकरण मांगें और उनके खिलाफ कोई सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाएं?
📢 ‘जवाबदेही चयनात्मक नहीं हो सकती’: सीएम भगवंत मान को भी घेरा
पंजाब सरकार और नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल:
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सीएम भगवंत मान पर तंज: आर.पी. सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान पूरे पंजाब में अपनी पार्टी को विरोध प्रदर्शन करने की छूट दे रहे हैं, लेकिन क्या उनमें इतनी हिम्मत है कि वे अपने पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल से कहें कि वे महाबल मिश्रा से इस पर जवाब तलब करें?
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सिद्धांत और नीति: उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि जवाबदेही और नैतिकता कभी भी चयनात्मक (Selective) नहीं हो सकती; जो नियम दूसरों पर लागू होते हैं, वही अपनी पार्टी के नेताओं पर भी लागू होने चाहिए।





