Digital Arrest Cyber Fraud: कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ का कोई प्रावधान नहीं, जालंधर पुलिस कमिश्नर ने जारी किया सख्त अलर्ट

जालंधर (पंजाब): साइबर अपराधियों द्वारा पुलिस या किसी केंद्रीय जांच एजेंसी (जैसे CBI, ED, या कस्टम्स) का वरिष्ठ अधिकारी बनकर आम नागरिकों को वीडियो कॉल के जरिए डराने और ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) के नाम पर करोड़ों की ठगी करने के बढ़ते मामलों को लेकर जालंधर पुलिस प्रशासन पूरी तरह सख्त हो गया है।
पुलिस कमिश्नर सतिंद्र सिंह ने आम नागरिकों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है। पुलिस कमिश्नरेट जालंधर की ओर से जारी आधिकारिक जागरूकता संदेश में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि देश के कानून या आपराधिक प्रक्रिया संहिता में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई विधिक व्यवस्था ही नहीं है। कोई भी वैध पुलिस अधिकारी या सरकारी एजेंसी किसी भी व्यक्ति को वीडियो कॉल या फोन कॉल पर कभी गिरफ्तार या नजरबंद नहीं कर सकती। साइबर अपराधी झूठी कानूनी धमकियां देकर लोगों को गहरे मानसिक तनाव में डालते हैं और फिर उनसे मोटी रकम, ओटीपी (OTP) तथा बैंकिंग क्रेडेंशियल्स ऐंठ लेते हैं।
🎭 पहचान पत्र व बैंक खातों का डर दिखाकर जालसाजी: कमरे में कैद रहने का बनाते हैं दबाव
साइबर ठगों का मॉडस ऑपरेंडी (काम करने का तरीका):
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काल्पनिक अपराधों का आरोप: ठग सबसे पहले फोन करके यह झूठा दावा करते हैं कि संबंधित व्यक्ति का आईडी प्रूफ, मोबाइल नंबर या बैंक खाता मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी या किसी बड़े वित्तीय अपराध से जुड़ा पाया गया है।
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नकली पुलिस वर्दी और सेटअप: इसके बाद वे स्काइप, व्हाट्सएप या अन्य प्लेटफॉर्म्स पर वीडियो कॉल करते हैं, जिसमें वे पुलिस या सीबीआई के आधिकारिक बैकड्रॉप और खाकी वर्दी में नजर आते हैं ताकि शिकार को पूरा विश्वास हो जाए।
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कमरे में कैद रखने का दबाव: वे पीड़ित को मानसिक रूप से इतना तोड़ देते हैं कि उसे वीडियो कॉल चालू रखने, किसी भी परिजन या वकील से बात न करने और जब तक “जांच” पूरी न हो तब तक उसी कमरे में बंद (‘डिजिटल अरेस्ट’) रहने का हुक्म सुनाते हैं।
💸 मामला रफा-दफा करने के नाम पर पैसों की उगाही: कभी न करें अज्ञात खातों में ट्रांसफर
आर्थिक ब्लैकमेलिंग और जालंधर सीपी का संदेश:
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केस खत्म करने का लालच: पुलिस कमिश्नर सतिंद्र सिंह ने बताया कि कई मामलों में जब पीड़ित भयभीत हो जाता है, तो ठग कानूनी कार्रवाई रोकने, एफआईआर न दर्ज करने या जमानत के नाम पर तत्काल “सिक्योरिटी डिपॉजिट” या जुर्माना भरने को कहते हैं।
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ठगी का स्पष्ट संकेत: उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच बंद करने या मदद करने के नाम पर सरकारी खातों के अलावा किसी भी व्यक्तिगत या अनजान बैंक खाते में पैसे की मांग करना 100% साइबर फ्रॉड का स्पष्ट प्रमाण है।
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घबराने के बजाय समझदारी जरूरी: सीपी ने आह्वान किया कि यदि कोई अज्ञात व्यक्ति पुलिस अधिकारी या किसी सरकारी महकमे का प्रतिनिधि बनकर ऐसी धमकियां दे, तो बिल्कुल भी न घबराएं, फोन काटें और किसी भी सूरत में ऑनलाइन भुगतान न करें।
🛡️ डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय:
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फोन या वीडियो कॉल पर कोई अरेस्ट नहीं: यह बात हमेशा याद रखें कि भारत का कोई भी कानून फोन या वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से किसी नागरिक को हिरासत में लेने की अनुमति नहीं देता।
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अज्ञात वीडियो कॉल्स न उठाएं: पुलिस या जांच एजेंसियां कभी भी व्हाट्सएप या अन्य मैसेंजर ऐप्स पर वीडियो कॉल के जरिए बयान या पूछताछ दर्ज नहीं करती हैं।
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बैंकिंग विवरण पूरी तरह गोपनीय रखें: किसी भी दबाव या धमकी के बावजूद अपना बैंक पासवर्ड, ओटीपी, सीवीवी (CVV) या वित्तीय जानकारी किसी अज्ञात व्यक्ति से साझा न करें।
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तत्काल 1930 पर शिकायत करें: यदि आपके साथ ऐसी कोई घटना घटती है या आपको ब्लैकमेल किया जाता है, तो तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें अथवा आधिकारिक वेबसाइट cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।





