Dhamtari Ganeshotsav: धमतरी में बप्पा का अलौकिक रूप! 20 फीट लंबी ‘शयन मुद्रा’ में विराजे लेटे हुए गणेशजी

धमतरी। गणेशोत्सव के पावन अवसर पर देशभर सहित छत्तीसगढ़ में विघ्नहर्ता भगवान श्री गणेश के अद्भुत और अलौकिक स्वरूप देखने को मिल रहे हैं। धमतरी शहर के रायपुर रोड स्थित लालबगीचा मोड़ पर एक गणेशोत्सव समिति ने ऐसी अनोखी प्रतिमा स्थापित की है, जो हर किसी के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। अमूमन भगवान गणेश को सिंहासन पर विराजमान या खड़े होकर आशीर्वाद देते हुए देखा जाता है, लेकिन धमतरी में बप्पा करीब 20 फीट लंबी भव्य ‘शयन मुद्रा’ (लेटे हुए स्वरूप) में नजर आ रहे हैं। इस दुर्लभ प्रतिमा को निहारने और तस्वीरों में कैद करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।
🛕 प्रयागराज के ‘लेटे हुए हनुमानजी’ से मिली प्रेरणा: बाढ़ के वायरल वीडियो ने दिखाया रास्ता
‘विघ्नहर्ता साम्राज्य गणेशोत्सव समिति’ के सदस्यों ने बताया कि प्रयागराज में जब गंगा नदी का जलस्तर बढ़ा था, तब वहां जलमग्न होने के बावजूद मंदिर में लेटे हुए हनुमानजी की प्रतिमा अपनी जगह अडिग रही थी।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए उसी दृश्य से प्रेरणा लेकर समिति ने इस बार धमतरी में भगवान गणेश को उसी तर्ज पर स्थापित करने का फैसला किया। पंडाल में प्रवेश करते ही राम नाम का संकीर्तन और सामने 20 फीट लंबे लेटे हुए गणेशजी के दर्शन पाकर श्रद्धालुओं को प्रयागराज के सुप्रसिद्ध लेटे हुए हनुमानजी के दिव्य स्वरूप की अनुभूति हो रही है।
🔔 भक्तिमय वातावरण और सेल्फी का क्रेज: हनुमान चालीसा व आरती से गूंज रहा पंडाल
भगवान गणेश की यह विशालकाय प्रतिमा न केवल देखने में अनोखी है, बल्कि पूरे पंडाल का वातावरण भी आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर है।
सुबह से ही पंडाल में हनुमान चालीसा के पाठ, मंत्रोच्चार और भव्य आरती का दौर शुरू हो जाता है। दर्शन के लिए आ रहे श्रद्धालु भगवान के सामने शीश नवाकर प्रार्थना कर रहे हैं। साथ ही इस अभूतपूर्व स्वरूप की यादों को सहेजने के लिए प्रतिमा के साथ फोटो और सेल्फी लेने की होड़ मची हुई है। श्रद्धालुओं का कहना है कि जो लोग प्रयागराज नहीं जा सकते, उन्हें धमतरी में ही उस अलौकिक स्वरूप का पुण्य लाभ मिल रहा है।
🤝 युवा समिति की 12 सालों की मेहनत: हर वर्ष अनूठी थीम पर तैयार की जाती है प्रतिमा
विघ्नहर्ता साम्राज्य गणेशोत्सव समिति का संचालन पूरी तरह से स्थानीय युवाओं की टीम द्वारा किया जाता है।
विगत 12 वर्षों से यह समिति हर गणेशोत्सव में कुछ नया और विशेष करने का प्रयास करती आ रही है। युवा सदस्य ही मिलकर पूरे पंडाल की थीम तय करते हैं, सजावट की रूपरेखा बनाते हैं और प्रतिमा के स्वरूप को अंतिम रूप देते हैं। इस बार भी युवाओं के इस टीमवर्क और नई सोच की बदौलत धमतरी शहर को यह ऐतिहासिक और यादगार गणेश प्रतिमा देखने को मिली है।





