Sirohi Municipal Election: सिरोही में मंदिर में कसम खाने के बाद भी बीजेपी में क्रास वोटिंग! पूजा माली को मिले सिर्फ 5 वोट

सिरोही। राजस्थान के सिरोही नगर परिषद के सभापति चुनाव के नतीजों ने हर किसी को चौंका दिया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने यहाँ सभापति पद के लिए पूजा माली को अपना अधिकृत उम्मीदवार बनाकर चुनावी मैदान में उतारा था। सिरोही में बीजेपी के सिंबल पर 10 पार्षद जीतकर आए थे। ऐसे में पार्टी रणनीतिकारों को पूरा भरोसा था कि इन 10 पार्षदों के समर्थन के साथ कुछ अन्य निर्दलीय पार्षदों को जोड़-तोड़कर आसानी से बोर्ड बना लिया जाएगा। हालांकि, क्रास वोटिंग की आशंका को देखते हुए बीजेपी के 5 पार्षदों को मंदिर ले जाकर बाकायदा कसम भी दिलाई गई थी, लेकिन नतीजे बिल्कुल उल्टे आए।
🛕 शनेश्वर महादेव मंदिर में दिलाई गई थी सौगंध: फिर भी पूजा माली को मिले महज 5 वोट
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मंदिर में कसम खाने वाले पार्षदों में खुद प्रत्याशी पूजा माली शामिल नहीं थीं।
गणित के हिसाब से यदि पूजा माली का अपना वोट और मंदिर में कसम खाने वाले 5 पार्षदों का वोट जोड़ लिया जाए, तो उन्हें कम से कम 6 वोट तो मिलने ही चाहिए थे। इसके अलावा पार्टी के अन्य 4 पार्षदों के वोट अलग थे। लेकिन जब मतों की गिनती हुई और अंतिम परिणाम आए, तो पता चला कि पूजा माली को केवल 5 ही वोट मिले हैं। यानी उनका खुद का वोट घटा दिया जाए तो कसम खाने वाले और पार्टी के अन्य पार्षदों में से बड़े पैमाने पर सेंधमारी हुई है।
❓ किसकी कसम झूठी और किसकी सच्ची?: सिरोही की सियासत में उठे गंभीर सवाल
चुनाव परिणाम सामने आने के बाद अब स्थानीय लोगों और राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि आखिर किस पार्षद की कसम झूठी निकली?
उल्लेखनीय है कि सभापति चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले वार्ड नंबर 1 की बीजेपी पार्षद पूनम अनिल प्रजापत, वार्ड नंबर 16 के मनीष प्रजापत, वार्ड नंबर 17 के गौरव, वार्ड नंबर 19 की संतोष और वार्ड नंबर 21 के सुनील गुप्ता ने प्रसिद्ध शनेश्वर जी महादेव मंदिर में पहुंचकर पार्टी प्रत्याशी को ही वोट देने की कसम खाई थी। मंदिर में सौगंध लेने की यह घटना पूरे जिले में भारी चर्चा का विषय बनी हुई थी।
💥 सिरोही से जयपुर तक सियासी हड़कंप: बीजेपी के रणनीतिकार पूरी तरह फेल
सभापति चुनाव का यह अप्रत्याशित परिणाम अब पूरे राजस्थान की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
चूंकि सभापति चुनाव में मतदान पूरी तरह गोपनीय प्रक्रिया के तहत होता है, इसलिए यह तो स्पष्ट रूप से सामने नहीं आ सका कि किस पार्षद ने किसके पक्ष में मतदान किया। लेकिन तमाम बाड़ाबंदी और धार्मिक सौगंध दिलाने जैसी मजबूत रणनीतिक तैयारियों के बावजूद बीजेपी रणनीतिकारों की इस करारी नाकामी की उम्मीद किसी को नहीं थी। इस हार की गूंज अब केवल सिरोही नगर परिषद तक सीमित नहीं है, बल्कि जयपुर स्थित बीजेपी प्रदेश मुख्यालय तक हड़कंप मचा हुआ है।





