DSPMU 3rd Convocation Ranchi: डीएसपीएमयू का तीसरा दीक्षांत समारोह संपन्न; 142 मेधावियों को मिला गोल्ड मेडल, 6415 को मिली डिग्री

रांची। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (DSPMU), रांची का तीसरा दीक्षांत समारोह गुरुवार को मोरहाबादी स्थित रांची विश्वविद्यालय के दीक्षांत मंडप में गरिमामय माहौल में आयोजित किया गया। इस भव्य समारोह में झारखंड के राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और दीक्षांत शोभायात्रा की अगुवाई की। समारोह में विद्यार्थियों की उत्कृष्ट शैक्षणिक उपलब्धियों को सम्मानित करते हुए विभिन्न स्नातकोत्तर, स्नातक एवं व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को डिग्रियां और स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।
🥇 142 मेधावियों को मिला गोल्ड मेडल: 6415 विद्यार्थियों को बांटी गईं डिग्रियां, छात्राओं ने लहराया परचम
समारोह के दौरान कुल 6,415 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 3,065 छात्र और 3,350 छात्राएं शामिल हैं।
विभिन्न संकायों में सर्वोच्च अंक हासिल करने वाले 142 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को गोल्ड मेडल से अलंकृत किया गया, जिनमें 93 छात्राएं और 49 छात्र शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, विभिन्न शोध विषयों पर कार्य पूर्ण करने वाले 20 शोधार्थियों को पीएचडी (Ph.D.) की उपाधि भी प्रदान की गई।
🥣 ‘हड़िया’ के सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व पर शोध: सुकन्या हेंब्रम को मिली पीएचडी की उपाधि
दीक्षांत समारोह में पीएचडी की उपाधि प्राप्त करने वाले शोधार्थियों में सुकन्या हेंब्रम का शोध विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
उन्होंने झारखंड के पारंपरिक जनजातीय पेय ‘हड़िया’ को अपने शोध का मुख्य विषय बनाया। सुकन्या ने बताया कि जनजातीय समाज में हड़िया का गहरा सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व है। उनके शोध में हड़िया के पूजन विधान, पारंपरिक मान्यताओं और झारखंडी जनजीवन में इसके औषधीय व सामाजिक पहलुओं का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया है। स्थानीय परंपराओं पर आधारित इस अनूठे शोध को मंच पर मिली सराहना ने विशेष पहचान प्रदान की।
🎖️ डॉ. राकेश मोहन को मानद डी.लिट. की उपाधि: राज्यपाल ने रिजर्व बैंक के पूर्व डिप्टी गवर्नर को किया सम्मानित
समारोह में देश के जाने-माने अर्थशास्त्री, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व डिप्टी गवर्नर डॉ. राकेश मोहन विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से पहली बार किसी महानुभाव को मानद डी.लिट. (D.Litt.) की उपाधि प्रदान की गई। राज्यपाल सह कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने डॉ. राकेश मोहन को इस मानद उपाधि से विभूषित किया। डॉ. राकेश मोहन ने अपना मुख्य दीक्षांत भाषण देते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए प्रेरित किया।
🏛️ ‘डिग्री मिलने के साथ बढ़ती है सामाजिक जिम्मेदारी’: राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार का दीक्षांत संदेश
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह जीवन की एक नई यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे विश्वविद्यालय में अर्जित अपने ज्ञान, कौशल और नैतिक मूल्यों का उपयोग समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान और राष्ट्र के विकास में करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि उच्च शिक्षा की डिग्री के साथ युवाओं पर सामाजिक दायित्व और जिम्मेदारी भी कई गुना बढ़ जाती है।
💡 ‘ज्ञान को केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित न रखें’: मुख्य वक्ता डॉ. राकेश मोहन की सीख
विशिष्ट अतिथि डॉ. राकेश मोहन ने अपने दीक्षांत भाषण में विद्यार्थियों को वैश्विक चुनौतियों का मुकाबला करने के लिए सदैव तैयार रहने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के माध्यम से प्राप्त ज्ञान और दक्षता को केवल व्यक्तिगत करियर या आर्थिक सफलता तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसका सदुपयोग देश की आर्थिक व सामाजिक उन्नति के लिए होना चाहिए।
🥳 ‘शिक्षकों और अभिभावकों का मिला पूरा मार्गदर्शन’: गोल्ड मेडलिस्ट विद्यार्थियों ने जताई खुशी
गोल्ड मेडल प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
स्वर्ण पदक विजेता विद्यार्थियों ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय विश्वविद्यालय के समर्पित प्राध्यापकों, माता-पिता और परिवार के अटूट सहयोग को दिया। विद्यार्थियों ने कहा कि निरंतर कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन की बदौलत ही वे आज इस मुकाम तक पहुँच पाए हैं।
👨🏫 कुलपति प्रो. राजीव मनोहर के कार्यकाल का पहला दीक्षांत समारोह: रिकॉर्ड समय में जारी हुए थे परिणाम
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर के सफल कार्यकाल का यह पहला दीक्षांत समारोह था, जिसके लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा व्यापक व सुव्यवस्थित तैयारियां की गई थीं।
इस दीक्षांत समारोह में सत्र 2024-26 के पीजी (PG) विद्यार्थियों को भी सम्मिलित किया गया। समय पर परीक्षाएं आयोजित कराने और पारदर्शी तरीके से परीक्षा परिणाम घोषित करने में विश्वविद्यालय के परीक्षा विभाग की भूमिका बेहद सराहनीय रही। दीक्षांत मंडप में दिन भर उल्लास और उत्सव का माहौल बना रहा।




