ब्रेकिंग
Rahul Gandhi Press Conference: CEC के खिलाफ प्रदर्शन में NSUI कार्यकर्ताओं पर पुलिसिया कार्रवाई, राह... Punjab Politics News: केवल ढिल्लों का आप सरकार पर तीखा हमला, मुख्यमंत्री भगवंत मान से इस्तीफे की मां... Gurdaspur Road Accident: गुरदासपुर में बस और मोटरसाइकिल की जोरदार टक्कर, स्कूल से लौट रहे पिता और मा... Gold and Silver Price Drop: सोना-चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी राहत, बुधवार को दोनों कीमती धातुओं क... Mansa School Closure Update: परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड के बाद मानसा में तनाव, स्कूलों और कॉलेजों म... Bathinda Cancer Deaths: बठिंडा के पक्का कलां गांव में कैंसर से मचा कोहराम, पिछले 15 दिनों में तीन लो... Pathankot Road Accident: पठानकोट में दर्दनाक हादसा, अज्ञात वाहन की टक्कर से सब्जी विक्रेता और आंगनवा... Parminder Singh Jhotta Murder: परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड में पुरानी रंजिश का एंगल आया सामने Jhabal Road Accident: झबाल में तेज रफ्तार ट्रक ने मारी टक्कर, आंगनवाड़ी वर्कर की दर्दनाक मौत और पति ... Mansa Gangster Murder Case: एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड, मुख्य आरोपी के घर और म...
देश

निजी अस्पतालों में मरीजों के इलाज की अधिकतम फीस तय करे केंद्र, SC ने हफ्ते भर में मांगा जवाब

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना के मरीजों का इलाज कर रहे प्राइवेट अस्पतालों में अधिकतम फीस तय करने के लिए केंद्र से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए एक सप्ताह के भीतर केंद्र की ओर से जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की प्रतिक्रिया की मांग करते हुए निजी अस्पतालों द्वारा COVID-19 मरीजों का इलाज करने के लिए ली जा रही फीस की ऊपरी सीमा निर्धारित करने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देश के निजी अस्पतालों में COVID-19 मरीजों के इलाज के खर्च की मांग करने वाली जनहित याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने अविषेक गोयनका द्वारा निजी अस्पतालों द्वारा COVID-19 उपचार की ऊपरी सीमा तय करने के लिए दायर जनहित याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी किया।

अदालत ने कहा कि जनहित याचिका की कॉपी सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दी जानी चाहिए, जो इस मुद्दे पर निर्देश देंगे और एक सप्ताह में जवाब देंगे। इस याचिका में संक्रमित लोगों के लिए भुगतान के आधार पर इस तरह की सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए एक विकल्प के साथ प्राइवेट क्वारंटाइन सुविधाओं और अस्पतालों की संख्या बढ़ाने की भी मांग की गई है और कहा गया है कि वर्तमान में इस तरह का विकल्प मरीजों को नहीं दिया जाता है।

यह भी कहा गया कि सरकार को ऐसी सुविधाओं के समान मानकों के लिए इलाज की सांकेतिक दरों को ठीक करने के लिए अस्पतालों से कहना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि बीमा कंपनियों द्वारा मेडिक्लेम का समयबद्ध निपटान किया जाना चाहिए और सभी बीमित रोगियों को कैशलेस उपचार की सुविधा दी जानी चाहिए।

Related Articles

Back to top button