Japanese Monks Maha Mandaleshwar: केन्ता इशियामा बने श्री महादेव गिरी और दाईसाकू बने श्रीकृष्णा गिरी जी महाराज

उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित प्रसिद्ध वीरभद्र महादेव मंदिर में सनातन धर्म और अध्यात्म से जुड़ी एक बेहद अनूठी और बड़ी खबर सामने आई है। यहां निरंजनी अखाड़े की ओर से आयोजित एक विशेष धार्मिक समारोह के दौरान वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच जापान से आए दो विदेशी साधकों का पट्टाभिषेक किया गया। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में संत समाज के कई प्रमुख पदाधिकारी और जापान से विशेष रूप से पहुंचे साधक व श्रद्धालु मौजूद रहे।
📿 केन्ता इशियामा बने ‘श्री महादेव गिरी’ और दाईसाकू नारीता बने ‘श्रीकृष्णा गिरी जी महाराज’
समारोह के दौरान भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत डॉ. रविंद्र पुरी, श्री निरंजन पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर आचार्य कैलाशानंद गिरी और महंत दर्शनभारती की उपस्थिति में अनुष्ठान संपन्न हुआ। जापान के केन्ता इशियामा (जिन्हें वल्लालर भी कहा जाता है) को संन्यास दीक्षा के बाद नया नाम श्री महादेव गिरी जी महाराज दिया गया। इसी प्रकार, जापान के ही दाईसाकू नारीता (सेन्थिल नाथन) को दीक्षा देकर श्रीकृष्णा गिरी जी महाराज नाम से महामंडलेश्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई।
🌍 बालकुंभ पुरी महाराज की शिष्य परंपरा से जुड़े हैं दोनों साधक, जापान में बढ़ रहा सनातन का विस्तार
जानकारी के अनुसार, ये दोनों नवनियुक्त महामंडलेश्वर बालकुंभ पुरी महाराज की प्रसिद्ध शिष्य परंपरा से जुड़े हुए हैं। बालकुंभ पुरी महाराज का पूर्व नाम ताकायुकी होशी था, जिन्होंने जापान में अपना कारोबार छोड़कर सनातन परंपरा को अपनाया था और वर्तमान में उनके जापान में ढाई हजार से अधिक शिष्य हैं। महामंडलेश्वर आचार्य कैलाशानंद गिरी ने कहा कि सनातन धर्म किसी एक देश तक सीमित नहीं है और आने वाले समय में जापान समेत पूरी दुनिया में वैदिक संस्कृति और संस्कृत का विस्तार तेजी से देखने को मिलेगा।





