ब्रेकिंग
Naghah Loh Dor Tradition: हाईवे के किनारे बिना कैमरे और कैशियर के बिकता है सामान, क्यूआर कोड से होता... Himachal Horticulture News: मौसम की मार से बागवान परेशान, बाजार में पहुंचे सिर्फ 1.15 करोड़ सेब के ब... Patna MLC Election News: मोकामा विधायक अनंत सिंह ने पार्टी उम्मीदवार के खिलाफ खोला मोर्चा, अनुज सिंह... UP News Today: बिजनौर के अमीखानपुर में 26 बीघा कृषि भूमि हथकंडे का मामला, एसपी केके बिश्नोई ने दी जा... Mumbai Manori Beach Accident: फंसे हुए विदेशी जहाज में गैस कटर से चोरी के दौरान चार की मौत, सनसनी Voter List Revision Maharashtra: बीएलओ के लिए नए नियम जारी, व्हाट्सऐप और घर-घर जाकर दस्तावेज स्वीकार... Amravati Road Accident News: शेगांव से दुर्गा मूर्ति लेकर वर्धा जा रही पिकअप गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त, व... Ramanujnagar Police Station: आरोपी दामाद भजन सिंह गिरफ्तार, पारिवारिक विवाद में की थी खौफनाक वारदात Gandhi Jayanti Special: रायपुर के शुक्ला भवन और जैतूसाव मठ में रुके थे महात्मा गांधी, अस्पृश्यता निव... SECR GM Tarun Prakash Visit: चांपा और नैला रेलवे स्टेशन पर सुपरफास्ट ट्रेनों के ठहराव की उठी मांग, म...
छत्तीसगढ़

Gandhi Jayanti Special: रायपुर के शुक्ला भवन और जैतूसाव मठ में रुके थे महात्मा गांधी, अस्पृश्यता निवारण के लिए किया था दौरा

देशभर में आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती बेहद श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। बापू को उनके महान और अमूल्य योगदान के लिए याद किया जा रहा है, लेकिन बहुत कम लोग इस बात से वाकिफ हैं कि छत्तीसगढ़ के साथ महात्मा गांधी का एक विशेष और आत्मीय लगाव था। वर्ष 1920 से लेकर 1947 में देश की आजादी तक छत्तीसगढ़ की धरती पर ‘गांधी युग’ का गहरा प्रभाव देखने को मिला था, जिसने यहां के स्वतंत्रता संग्राम को एक नई दिशा दी थी।

🚂 पहली बार 20 दिसंबर 1920 को छत्तीसगढ़ आए थे बापू: पंडित सुंदरलाल शर्मा के आमंत्रण पर पहुंचे थे धमतरी और रायपुर

इतिहास के पन्नों के अनुसार, महात्मा गांधी से पहले छत्तीसगढ़ में ‘तिलक युग’ का प्रभाव हुआ करता था। बापू पहली बार 20 दिसंबर 1920 को छत्तीसगढ़ की धरती पर आए थे। उन्हें यह आमंत्रण स्वतंत्रता सेनानी पंडित सुंदरलाल शर्मा ने धमतरी के प्रसिद्ध ‘कंडेल नहर सत्याग्रह’ की चर्चा और समर्थन के लिए दिया था। रायपुर पहुंचने के बाद गांधीजी धमतरी गए थे, जिसके प्रभाव से वहां नहर सत्याग्रह सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था। नागपुर स्टेशन पर भी इस ऐतिहासिक यात्रा का उल्लेख मिलता है।

🏠 रायपुर के ऐतिहासिक शुक्ला भवन और जैतूसाव मठ में रुके थे महात्मा गांधी: अस्पृश्यता निवारण के लिए चलाया था अभियान

इतिहासकार डॉ. रमेंद्रनाथ मिश्र के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में गांधीजी का दूसरा प्रवास 22 से 28 नवंबर 1933 के दौरान हुआ था। इस बार उनका मुख्य उद्देश्य छुआछूत और अस्पृश्यता का निवारण करना था। वे रायपुर के बूढ़ापारा स्थित ‘शुक्ला भवन’ के ऊपरी कक्ष में एक सप्ताह तक रुके थे। इस दौरान उन्होंने मोती बाग चौक, सप्रे स्कूल और राजकुमार कॉलेज का दौरा कर सामाजिक समानता का संदेश दिया। इसके अलावा, जैतूसाव मठ में उन्होंने एक अछूत कन्या के हाथों कुएं से पानी निकलवाकर समाज को बड़ा संदेश दिया था, जिसकी याद में वहां ‘गांधी भवन’ की स्थापना की गई है।

Related Articles

Back to top button