Jharkhand Congress News: रिनपास के प्रभारी निदेशक और भ्रष्टाचार के खिलाफ रांची में प्रदर्शन, उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

राजधानी रांची के कांके स्थित झारखंड सरकार के प्रमुख मानसिक रोग संस्थान ‘रिनपास’ (RINPAS) में शनिवार से रांची जिला कांग्रेस अनुसूचित जाति (SC) विभाग के बैनर तले अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की शुरुआत हो गई है। धरने पर बैठे कांग्रेसी नेताओं ने आरोप लगाया है कि रिनपास संस्थान में आउटसोर्सिंग के नाम पर दलितों के संवैधानिक अधिकारों की सरासर हकमारी की जा रही है और यहां मनमाने तरीके से काम चलाया जा रहा है।
🚫 ब्लैकलिस्टेड कंपनियों पर गंभीर आरोप: आरक्षण रोस्टर का पालन नहीं करने से भड़के कांग्रेसी नेता
धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे रांची जिला अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष महेश कुमार मनीष ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि जिन ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को संस्थान में काम सौंपा गया है, वे नियमों को ताक पर रखकर आरक्षण रोस्टर का बिल्कुल भी पालन नहीं कर रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थान में पिछले 19 वर्षों से किसी योग्य स्थायी निदेशक की नियुक्ति करने के बजाय केवल प्रभारी निदेशकों के सहारे ही काम चलाया जा रहा है।
🔍 भ्रष्टाचार पर लगाम और उच्चस्तरीय जांच की मांग: स्थायी निदेशक नियुक्त करने की पुरजोर वकालत
महेश कुमार मनीष ने आगे कहा कि जिस प्रभारी निदेशक पर पहले से ही बेहद गंभीर आरोप लगे हों, उनके कार्यकाल में रिनपास के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना कतई संभव नहीं है। ऐसी स्थिति में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की मुख्य मांग है कि रिनपास में जल्द से जल्द किसी योग्य और स्थायी निदेशक की नियुक्ति की जाए। साथ ही, ब्लैकलिस्टेड कंपनियों के साथ किए गए आउटसोर्सिंग एमओयू (MoU) को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए और उनके द्वारा की गई तमाम गड़बड़ियों की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
📢 प्रशासनिक पारदर्शिता की अपील: कार्रवाई न होने पर मजबूरी में उठाया गया कदम
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि रिनपास जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण मानसिक स्वास्थ्य संस्थान में पारदर्शी प्रशासन और जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। इस संबंध में विभाग ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और संबंधित विभागीय मंत्री को भी रिनपास की इन तमाम समस्याओं से पूरी तरह अवगत कराया था, लेकिन जब इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब जाकर उन्हें मजबूरन इस अनिश्चितकालीन धरने का रास्ता अपनाना पड़ा।





