Shahdol Ahilya Bai Weaver Fair: शहडोल में देवी अहिल्याबाई बुनकर मेला समाप्त, चंदेरी-महेश्वरी साड़ियों और काष्ठ कला की रही धूम

शहडोल: शहर में देवी अहिल्याबाई बुनकर मेले का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध चंदेरी और महेश्वरी जैसी पारंपरिक साड़ियों की जबरदस्त धूम देखने को मिली। इसके अलावा शहडोल के छतवई स्थित हस्तशिल्प एवं हथकरघा केंद्र में तैयार होने वाले काष्ठ (लकड़ी) के कलाकारों की शानदार कलाकारी को देखने के लिए लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। प्रदेश भर के अलग-अलग जिलों से व्यापारी इस मेले में हिस्सा लेने पहुँचे थे, जिनके द्वारा लाए गए हैंडमेड प्रोडक्ट्स को शहरवासियों ने काफी पसंद किया।
🗺️ विभिन्न जिलों से पहुँचे स्व-सहायता समूह और महिलाओं के स्टॉल
शहडोल जिला मुख्यालय के जय स्तंभ चौक के पास पिछले कुछ दिनों से देवी अहिल्याबाई बुनकर मेले का आयोजन किया जा रहा था। इस मेले का शुभारंभ 8 अक्टूबर को किया गया था, जिसमें मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए व्यापारियों और कारीगरों ने अपने उत्पादों के साथ हिस्सा लिया। इस सफल आयोजन को लेकर संयुक्त कमिश्नर मुद्रिका सिंह ने कहा कि इस तरह के मेलों के आयोजन से बुनकरों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं और स्थानीय कारीगरों का मनोबल काफी बढ़ता है और उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत होती है।
इस मेले में रीवा, सीधी, शहडोल, उमरिया, उज्जैन, मंदसौर, खंडवा, चंदेरी, ग्वालियर और सीहोर (बुदनी) सहित अन्य कई जिलों के स्व-सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों के विशेष स्टॉल लगाए गए थे। मेले के अंत में सभी भाग लेने वाले कारीगरों, बुनकरों और महिलाओं को प्रमाण-पत्र भी प्रदान किए गए।
💰 जमकर हुई खरीदारी, चंदेरी और कोसा साड़ियों की रही मांग
आयोजित इस मेले में चंदेरी साड़ी व सूट्स, बुटीक प्रिंट साड़ी एवं सूट्स, स्टोन ज्वेलरी, महेश्वरी साड़ी व सूट्स, ब्लॉक प्रिंट साड़ी, पर्दे, चमड़े के पर्स, बेल्ट, तरुशिल्प, कोसा साड़ी, ड्रेस मटेरियल और जरी-जरदोजी साड़ियों सहित विभिन्न शिल्प सामग्रियों की लोगों ने जमकर खरीदारी की। मेले में विशेष रूप से चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों को खरीदने के लिए खरीदारों में खासा उत्साह देखा गया।
🪵 शहडोल के काष्ठ कलाकारों की कलाकारी ने खींचा सबका ध्यान
इस मेले में शहडोल के छतवई स्थित हस्तशिल्प एवं हथकरघा केंद्र के काष्ठ (लकड़ी) कलाकारों और बुनकरों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, जिनकी कलाकारी की बाजार में गजब की डिमांड रही। विशेष तौर पर लकड़ी पर उकेरी गई भगवान गणेश जी की मूर्तियों की भारी मांग देखने को मिली। लोगों ने इसके अलावा विभिन्न प्रकार के सुंदर मुखौटों और अन्य मूर्तियों की भी जमकर खरीदारी की। इन उम्दा कलाकृतियों को देखने के लिए दूर-दूर से लोग मेले में पहुँच रहे थे।
छतवई हस्तशिल्प एवं हथकरघा केंद्र के इंचार्ज एस.एस. पांडे बताते हैं कि “मेले में हमारे कारीगरों द्वारा लकड़ी पर की गई नक्काशी और कलाकारी को देखने के लिए अच्छी खासी तादाद में लोग पहुँचे। कई लोगों ने उचित दामों पर अलग-अलग मूर्तियां खरीदीं। इसके अलावा बुनकरों द्वारा तैयार किए गए कालीन और दरियों को भी लोगों ने बहुत सराहा और खरीदा।” एस.एस. पांडे का मानना है कि इस तरह के मेलों के आयोजन से कलाकारों का हौसला बढ़ता है और उन्हें अपने उत्पादों को सीधे बाजार में बेचने का एक बेहतरीन मंच मिलता है, इसलिए ऐसे आयोजन निरंतर होते रहने चाहिए।




