ब्रेकिंग
दिल्ली के व्यापारियों ने राहुल गांधी को लिखा पत्र, दिवाली के सीजन में 1 नवंबर की महारैली को स्थगित क... Supreme Court on Real Estate Projects: 'हर अटके प्रोजेक्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट फोरम नहीं बन सकता', ह... जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में आंतरिक असंतोष... Allahabad High Court News: अदालत में हंगामा और तोड़फोड़ करने वाले वकीलों पर हाईकोर्ट सख्त, सीसीटीवी ... दिल्ली-एनसीआर में कोहराम मचाने वाला एक लाख का इनामी कुख्यात बदमाश धर्मेंद्र बावरिया गाजियाबाद में पु... Madhepura News: जेएनकेटी मेडिकल कॉलेज के 5वीं मंजिल से ग्रिल और बेडशीट के सहारे भागे दो कैदी गिरफ्ता... NPPA Cancer Drugs Price Drop: कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत, NPPA ने जारी की 543 दवाओं के संशोधित MRP... Delhi BJP Padayatra: चांदनी चौक में बीजेपी की ‘लोकतंत्र बचाओ-अराजकता हटाओ’ पदयात्रा, सीएम रेखा गुप्त... Noida News: दिवाली पर 5100 रुपए बोनस मिलने का वायरल मैसेज निकला फर्जी, सुप्रीम कोर्ट के नाम पर फैलाए... Delhi Voter List SIR Update: फॉर्म-6 और फॉर्म-8 के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने ECI से पूछा सवाल, लाखों...
मध्यप्रदेश

Bhopal Minor Rape Case Verdict: नाबालिग बच्चियों से दुष्कर्म के मामले में अखबार के 78 वर्षीय पूर्व मालिक को उम्रकैद, अदालत ने लगाया 77 लाख का जुर्माना

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित पॉक्सो (POCSO) मामलों की एक विशेष अदालत ने नाबालिग लड़कियों से जुड़े बहुचर्चित दुष्कर्म और यौन उत्पीड़न के मामले में एक बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने एक स्थानीय अखबार के 78 वर्षीय पूर्व मालिक को विभिन्न मामलों में दोषी करार देते हुए कुल 10 उम्रकैद की सजाएं सुनाई हैं। इसके साथ ही, अदालत ने आरोपी पर 77 लाख 64 हजार रुपये का भारी-भरकम आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। इस सनसनीखेज मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने मुख्य आरोपी के साथ-साथ उसकी सहयोगी महिला को भी इस घिनौने अपराध में संलिप्त पाने पर 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।

8 मामलों में ‘अंतिम सांस तक जेल’ की सजा, सभी सजाएं एक साथ भुगतनी होंगी

मामले की पैरवी कर रहे विशेष लोक अभियोजक पी. एन. सिंह राजपूत ने अदालत के इस कड़े फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि पॉक्सो अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुख्य आरोपी को कुल 10 उम्रकैद की सजाएं दी गई हैं। इन सभी सजाओं में से 8 सजाएं ऐसी हैं जिनमें दोषी को अपने जीवन के अंतिम क्षण तक जेल की सलाखों के पीछे रहना होगा, जबकि दो अन्य सामान्य उम्रकैद की सजाएं शामिल हैं। अदालत के निर्देशानुसार ये सभी सजाएं एक साथ चलाई जाएंगी। इसके अलावा, मासूम बच्चियों को बहला-फुसलाकर लाने और आरोपी की आपराधिक गतिविधियों में सहयोग करने वाली उसकी महिला सहयोगी को भी 20 साल की लंबी जेल की सजा दी गई है।

10,000 रुपये मासिक वेतन की नौकरी का लालच देकर वर्ष 2014 से मासूमों को बना रहा था अपना शिकार

अभियोजन पक्ष की जांच के दौरान आरोपी की ओर से अपनाए जाने वाले शातिर तरीकों और उसके काले कारनामों का खुलासा हुआ। जांच में सामने आया कि आरोपी वर्ष 2014 से लगातार गरीब और बेसहारा परिवारों की नाबालिग लड़कियों को अपना निशाना बना रहा था। वह पीड़ित बच्चियों को 10,000 रुपये प्रति माह की नौकरी दिलाने का झूठा लालच देता था। नौकरी के बहाने युवतियों और बच्चियों को अपने पास बुलाकर वह उनका शारीरिक शोषण करता था और उनके साथ दुष्कर्म की वारदातों को अंजाम देता था। इस गंदे काम में उसकी महिला सहयोगी उसकी हरसंभव मदद करती थी।

जुलाई 2020 में एक पीड़िता की हिम्मत से खुला राज, जन्मदिन की पार्टी के बहाने बुलाया गया था फ्लैट

इस सनसनीखेज मामले का काला सच जुलाई 2020 में तब उजागर हुआ जब एक काउंसलिंग सत्र के दौरान एक पीड़ित नाबालिग ने साहस का परिचय देते हुए अपनी आपबीती अधिकारियों को सुनाई। पीड़िता ने बताया कि उसे भोपाल के एक पॉश इलाके शाहपुरा स्थित एक फ्लैट में एक लड़की का जन्मदिन मनाने के बहाने बुलाया गया था। वहां पहुंचने के बाद नाबालिग को जबरन नशीले पदार्थ या शराब पिलाई गई, जिसके बाद मुख्य आरोपी ने उसके साथ गंभीर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म किया। जब पुलिस ने इस एक शिकायत पर गहराई से तफ्तीश शुरू की, तो कई अन्य पीड़ित नाबालिगों ने भी सामने आकर आरोपियों द्वारा किए गए उत्पीड़न के बारे में खुलकर बताया।

विशेष पुलिस टीम ने जुटाए ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य, अदालत ने कड़ा संदेश देते हुए सुनाया ऐतिहासिक फैसला

घटना की गंभीरता को देखते हुए भोपाल पुलिस ने त्वरित और बेहद सख्त रुख अपनाया था। पुलिस की विशेष टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मजबूत चार्जशीट तैयार की थी। अदालत ने तमाम गवाहों के बयान और पुख्ता सबूतों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद आरोपी को हर तरह से दोषी पाया। अदालत के इस ऐतिहासिक फैसले से समाज में एक कड़ा संदेश गया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को कानून से कोई राहत नहीं मिल सकती है।

Related Articles

Back to top button