चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में छात्रों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा फैसला, स्कूलों में पीने के पानी की गुणवत्ता की होगी विशेष जांच

चंडीगढ़: हरियाणा के सरकारी शिक्षण संस्थानों में शिक्षा ग्रहण करने वाले लाखों विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए राज्य सरकार ने एक अहम और सराहनीय कदम उठाया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में संपन्न हुई एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के उपरांत, हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद की तरफ से प्रदेशभर के तमाम सरकारी स्कूलों में पीने के पानी की शुद्धता व गुणवत्ता की जांच करने तथा आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। परियोजना परिषद द्वारा इस संबंध में सभी जिलों के अतिरिक्त उपायुक्तों, जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO), जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) तथा समग्र शिक्षा के जिला परियोजना समन्वयकों (DPC) को पत्र जारी कर इस अभियान पर त्वरित गति से अमल करने के आदेश दिए गए हैं।
जन स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से लिए जाएंगे पानी के सैंपल, आधिकारिक पोर्टल पर अपलोड करनी होगी पूरी रिपोर्ट
जारी किए गए आधिकारिक निर्देशों के मुताबिक, बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील कार्य को शीर्ष प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में उपलब्ध कराए जा रहे पेयजल के नमूनों (सैंपल्स) की जांच का कार्य जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के आपसी समन्वय से संपन्न किया जाएगा। पानी की टेस्टिंग के उपरांत जो शिक्षण संस्थान तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उन स्कूलों की विस्तृत रिपोर्ट संबंधित स्कूल लॉगिन के माध्यम से आधिकारिक वेब पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपडेट करनी होगी। सभी संबंधित जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपसी बेहतर तालमेल बिठाते हुए निर्धारित समय-सीमा के भीतर समेकित रिपोर्ट राज्य मुख्यालय को प्रेषित करें।
अमानक या दूषित पानी मिलने पर तुरंत लगाए जाएंगे RO प्यूरीफायर, स्वच्छता एक्शन प्लान के तहत खर्च होगा बजट
जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद जिन-जिन स्कूलों का पानी पीने योग्य या सुरक्षित नहीं पाया जाएगा, वहां बिना किसी देरी के त्वरित सुधारात्मक उपाय अमल में लाए जाएंगे। स्थिति की मांग और आवश्यकतानुसार ऐसे सभी स्कूलों में आर.ओ. (RO) सिस्टम या अन्य आधुनिक वाटर प्यूरीफिकेशन तकनीक स्थापित की जाएगी ताकि हर छात्र को शुद्ध पेयजल मिल सके। पेयजल की सैंपलिंग, टेस्टिंग और वाटर प्यूरीफायर लगाने पर होने वाले कुल खर्च का वहन समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को मिलने वाली वार्षिक स्कूल ग्रांट के ‘स्वच्छता एक्शन प्लान’ के अंतर्गत निर्धारित 10 प्रतिशत राशि से किया जाएगा।





