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कोरोना महामारी के खिलाफ राष्ट्रीय योजना बनाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में लगाई गई गुहार

नई दिल्ली। एक गैरसरकारी संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कोविड-19 महामारी से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत राष्ट्रीय योजना बनाने और उसे लागू करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की है। याचिका में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष (पीएम केयर्स फंड) में प्राप्त चंदे की पूरी राशि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) में जमा करने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश देने की भी मांग की गई है। अधिवक्ता प्रशांत भूषण के जरिये यह याचिका सेंटर फॉर पब्लिक इंटेरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआइएल) ने दायर की है।

याचिका में कहा गया है, आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 46 (1)(बी) के अनुरूप, मौजूदा एवं भविष्य में प्राप्त होने वाला सारा चंदा कोविड-19 से निपटने के लिए एनडीआरएफ में डाल देना चाहिए। यही नहीं याचिका में यह भी कहा गया है कि महामारी से निपटने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 10 और 11 के तहत एक राष्ट्रीय योजना तैयार, अधिसूचित और लागू किया जाना चाहिए। याचिका में इस बात का जिक्र किया गया है कि विश्व में कोविड-19 के मामलों में भारत चौथे स्थान तक पहुंच गया है।

न्यूनतम मानक निर्धारित करने की गुजारिश

याचिका में मांग की गई है कि अधिनियम की धारा 12 के अनुरूप सरकार को कोविड-19 रोगियों को राहत मुहैया करने के लिए एक न्यूनतम मानक अवश्य निर्धारित किया जाना चाहिए। याचिका में कहा गया है कि अभूतपूर्व संकट के मद्देनजर अचानक अस्थायी आदेश जारी करना स्वाभाविक है। लेकिन लॉकडाउन लागू होने के दो महीने बाद एक मजबूत राष्ट्रीय योजना की जरूरत है।

सुप्रीम कोर्ट ने दिया मोरेटोरियम मामले में बैठक का निर्देश

इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआइ) को मोरेटोरियम मामले को सुलझाने के लिए तीन दिनों के भीतर बैठक करने का निर्देश दिया है। यह मामला लॉकडाउन के चलते घोषित किए गए मोरेटोरियम की अवधि में लगाए जाने वाले ब्याज में छूट से संबंधित है। कोर्ट इस मामले में दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। मामले पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि केवल मोरेटोरियम अवधि के दौरान लगने वाले ब्याज से छूट का नहीं है। बल्कि यह बैंकों द्वारा लगाए गए ब्याज से भी संबंधित हैं।

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