US Midterm Elections Donald Trump Test: अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन का बड़ा इम्तिहान, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों पर जनता का फैसला आज

वाशिंगटन: संयुक्त राज्य अमेरिका में आज लोकतंत्र का एक बहुत बड़ा इम्तिहान हो रहा है। मिडटर्म इलेक्शन (मध्य-सत्र चुनावों) के इस कड़े मुकाबले में अमेरिकी जनता यह तय करने जा रही है कि संसद के दोनों सदनों पर आखिरकार किसका राजनीतिक दबदबा रहेगा। क्या राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को जनता का प्रत्यक्ष समर्थन मिलेगा या फिर विपक्षी दल अपनी ताकत बढ़ाने में कामयाब होंगे? सीनेट से लेकर हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स तक की हर एक सीट के आने वाले परिणाम का असर सीधे तौर पर आगामी दो सालों की अमेरिकी राजनीति और वैश्विक भू-राजनीति (जियो पॉलिटिक्स) पर पड़ना पूरी तरह तय माना जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन के लिए मिडटर्म चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी सीटों पर डाले जा रहे हैं वोट
एक तरफ जहां सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी है, तो दूसरी तरफ मजबूत विपक्ष के रूप में डेमोक्रेटिक पार्टी मैदान में है। अमेरिका में इस मिडटर्म चुनाव के लिए अर्ली वोटिंग (शुरुआती मतदान) की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी। संसद के उच्च सदन सीनेट की कुल 100 सीटों में से 35 सीटों पर, जबकि निचले सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की सभी 435 सीटों पर मतदाता अपना फैसला सुना रहे हैं। इसके साथ ही देश के 36 अलग-अलग राज्यों में गवर्नरों के लिए भी चुनाव हो रहे हैं। यही मुख्य वजह है कि इस चुनाव को राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि राष्ट्रपति चुनाव जीतना एक बात होती है, लेकिन सत्ता संभालने के दो साल बाद भी जनता का भरोसा और बहुमत बरकरार रखना बिल्कुल अलग चुनौती है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव से पहले जनता को किया संबोधित, डेमोक्रेटिक पार्टी की नीतियों पर उठाए गंभीर सवाल
इस चुनावी मुकाबले में भले ही राष्ट्रपति ट्रंप खुद सीधे तौर पर उम्मीदवार नहीं हैं, लेकिन संपूर्ण चुनावी बहस और प्रचार के केंद्र में वही बने हुए हैं। मतदान से ठीक पहले राष्ट्र को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “जैसा कि आप सभी जानते हैं, आज मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले का अहम दिन है। मेरा मानना है कि यह हमारी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण मध्य-सत्र चुनाव हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने ऐसे उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है जिन्हें अमेरिकी इतिहास का सबसे कट्टरपंथी और खतरनाक कहा जा सकता है। उनकी नीतियां देश के बॉर्डर्स को पूरी तरह खोल देंगी, खरबों का नया टैक्स लाद देंगी और तेल-प्राकृतिक गैस के उत्पादन को ठप करने का प्रयास करेंगी।”
पोलिंग ट्रेंड्स में डेमोक्रेट्स की बढ़ती बढ़त, महंगाई, इमिग्रेशन और ऊर्जा कीमतें बने अमेरिकी मतदाताओं के मुख्य मुद्दे
विभिन्न पोलिंग ट्रेंड्स और सर्वेक्षणों के अनुसार, शुरुआती आंकड़ों में डेमोक्रेट्स बढ़त बनाते हुए नजर आ रहे हैं और राष्ट्रीय स्तर पर वे रिपब्लिकन पार्टी से कुछ अंक आगे चल रहे हैं। अमेरिकी मतदाताओं के सामने इस समय कई गंभीर और बुनियादी सवाल खड़े हैं, जिनमें रोजमर्रा की जिंदगी का बढ़ता खर्च, पेट्रोल और ऊर्जा की बढ़ती कीमतें, ट्रंप की टैरिफ नीतियां, विदेश नीति, इमिग्रेशन और सीमा सुरक्षा तथा रोजगार एवं स्वास्थ्य सेवाएं शामिल हैं। जनता के सामने केवल यह सवाल नहीं है कि अमेरिका दुनिया में कितनी सैन्य ताकत रखता है, बल्कि मुख्य सवाल यह है कि एक आम अमेरिकी परिवार की जेब में कितनी आर्थिक राहत है।
पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की चिंताएं और वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर खड़े हुए कड़े सवाल
इस बीच, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी देश की मौजूदा स्थिति और विदेश नीति को लेकर अपनी गहरी चिंताएं व्यक्त की हैं। उन्होंने कहा कि आज हमारे सहयोगी देशों और सैन्य ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, कई अमेरिकी नागरिक अपनी जान गंवा चुके हैं और सैन्य साजो-सामान के भंडार में भी कमी आई है, जिससे सुरक्षा का खतरा और बढ़ गया है। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि अमेरिकी जनता व्हाइट हाउस के मौजूदा प्रशासन के साथ मजबूती से खड़ी होती है या फिर कांग्रेस (संसद) के संतुलन को बदलकर सत्ता के समीकरण में फेरबदल करती है।





