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रूस ने दो साल बाद Telegram से हटाया बैन, प्रतिबंध हटाने की बताई ये वजह

नई दिल्ली। मैसेजिंग ऐप Telegram पर दो साल से लगे प्रतिबंध को रूस ने हटा दिया है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक रूस के टेलीकॉम वॉचडॉग रोसकोम्नाडजोर ने कहा कि कंपनी ने आतंकवाद विरोधी प्रयासों में मदद करने की इच्छा दिखाई, जिसके बाद रूस ने Telegram से बैन हटाने का निर्णय लिया है। बता दें कि अप्रैल 2018 में रूस की कोर्ट ने Telegram ऐप को उस वक्त ब्लॉक कर दिया था, जब Telegram ने अपनी encryption Key को सरकार के साथ साझा करने से इनकार कर दिया था। मतलब कंपनी ने यूजर एक्सेस डेटा को सरकार के साथ साझा करने से मना कर दिया था। ऐसे भी आरोप लगे कि Telegram का इस्तेमाल आतंकी संगठन करते हैं, जिनकी हिस्ट्री Telegram के पास मौजूद हैं।

रूस का दावा है कि Telegram की तरफ से encryption Key मुहैया न कराने के चलते रूस के आतंकवाद विरोधी प्रयासों को झटका लगा। हालांकि Telegram के सीईओ Pavel Durov ने साल 2018 में कहा था कि यह यूजर की गोपनियता का हिस्सा है। Durov के मुताबिक बढ़ावा “गोपनीयता बिक्री के लिए नहीं है, और मानवाधिकार के मुद्दे पर डर या लालच से समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

Independent की रिपोर्ट के मुताबिक रूस का Telegram को बैन करने का प्रयास असफल रहा। Amazon और Google Cloud प्लेटफॉर्म पर करीब 15.8 मिलियन IPs को बैन कर दिए गए। लेकिन इसके बावजूद रूस में यूजर Telegram का इस्तेमाल करते रहे। रूस सरकार ने इंटरनेट Anonymizers और VPN सर्विस को ब्लॉक कर दिया, जिसके सहारे रूस में छिपकर Telegram चलाया जाता था। इस महीने की शुरुआत में Durov ने कहा कि रूस में अधिकारियों को Telegram से प्रतिबंध हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कंपनी ने प्लेटफॉर्म पर चरमपंथी सामग्री का पता लगाने और हटाने के लिए अपने उपकरणों में सुधार किया है। Telegram ने अप्रैल में कहा था कि उसके प्लेटफॉर्म पर पिछले दो साल में एक्टिव Telegram यूजर की संख्या दोगुना हो गई है।

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