मॉस्को की विक्ट्री परेड पर गलवन घाटी के तनाव का असर, नहीं मिलेंगे भारत-चीन के रक्षा मंत्री

मास्को। पूर्वी लद्दाख के गलवन घाटी पर भारत-चीन के मध्य तनाव का असर मास्को की विजय परेड पर दिखेगा। भारत ने दो टूक कहा है कि रूस की राजधानी मास्को में भारत के रक्षा मंत्री की मुलाकात चीन के उनके समकक्ष के साथ नहीं होगी। भारत ने उस खबर का खंडन किया है, जिसमें यह कहा जा रहा था कि रूस के दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की मुलाकात अपने चीनी समकक्ष के साथ होगी। मॉस्को की 75वीं विकट्री परेड में चीन के विदेश मंत्री भी शामिल होंगे। बता दें कि 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवन घाटी में दोनों सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हो गई थी। इस संघर्ष में 35 चीनी सैनिक भी हताहत हुए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा पर तनाव बरकरार है। यह टकराव चीन की सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।
रक्षा मंत्री का रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव से मुलाकत
रूस के निमंत्रण पर तीन दिवसीय दौरे पर मॉस्को गए राजनाथ ने कहा कि रूस के उपप्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव की मुलाकात में रक्षा सहयोग की समीक्षा के साथ ही इस पर विस्तार से चर्चा हुई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन इसी साल भारत आने को तैयार हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा कि रूस के उप प्रधानमंत्री यूरी बोरिसोव के साथ एक शानदार बैठक हुई है। भारत और रूस विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त सामरिक भागीदारी करते हैं और रक्षा संबंध इसके महत्वपूर्ण स्तंभों में से एक है। हमने अपने रक्षा सहयोग की समीक्षा की और इसके विस्तार के तरीकों पर चर्चा की।






