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कालानाग पर्वत फतह करने वाले छत्तीसगढ़ के पहले पर्वतारोही बने बंशी

कांकेर। उत्तराखंड स्थित कालानाग पर्वत फतह करने वाले बंशीलाल नेताम छत्तीसगढ़ के पहले व्यक्ति बन गए हैं। उन्होंने11 दिन तक माइनस 15 डिग्री तापमान में चढ़ाई कर छह हजार मीटर से भी अधिक की चढ़ाई पूरी की। बरदेभाटा वार्ड निवासी बंशीलाल नेताम (43) बीजापुर जिला पुलिस बल में पीटीआई के पद कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी टीम, इसमें जगदलपुर जिला पुलिस बल में कार्यरत राजनांदगांव जिले की पूर्णिमा ठाकुर (30) के साथ मिलकर उत्तराखंड के कालानाग पर्वत के शिखर पर पहुंचे। बंशीलाल का दावा है कि कालानाग पर्वत के शिखर पर चढ़ने वाले वे छत्तीसगढ़ के पहले व्यक्ति है। साथ ही पूर्णिमा ठाकुर कालनाग पर्वत पर चढ़ने वाली पहली महिला पर्वतारोही हैं।

बंशीलाल बताते है कि उन्हें पर्वतारोहण का शौक है। इसके चलते वह पूर्णिमा ठाकुर के साथ उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित कालानाग पर्वत (ऊंचाई 6387 मीटर) पर चढ़ाई करने के लिए एक जून को कांकेर से रवाना हुए थे। इसके पहले उनका फिजिकल टेस्ट और मेडिकल टेस्ट के बाद इस उच्च स्तरीय पर्वतारोहण कोर्स के लिए चयन हुआ था। 3 जून को उत्तरकाशी के सांकरी गांव पहुंचे। जहां गाइड शेरपा श्रवण कुमार थापा, एडवांस गाइड प्रमोद कुमार राणा, गाइड विजय पवार, कुक विज्जू सहित छह लोगों को टीम ने 5 जून को कालानाग पर्वत पर चढ़ाई शुरू की। 11वें दिन 15 जून को सुबह साढ़े छह बजे पर्वत के शिखर पर पहुंचे। इस दौरान 62 किलोमीटर की दूरी तय की। इसके बाद 18 जून को तीन दिन में उनकी टीम वापस सांकरी गांव पहुंच गई।

माइनस 20 डिग्री तापमान में की चढ़ाई

कालानाग पर्वत की चढ़ाई पूरी करने में पर्वतारोहियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। बंशीलाल नेताम ने बताया कि वहां माइनस 15 से 20 डिग्री तक तापमान था और ऊंचाई पर अधिक होने के कारण ऑक्सीजन की मात्रा भी कम थी। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 4 से 7 किलोमीटर की दूरी उनकी टीम तय करती थी। अंतिम दिन डेढ़ किलोमीटर की चढ़ाई बहुत कठिन थी। इसे पूरा करने में छह घंटे लग गए। रात 12.30 बजे चढ़ाई शुरू की। सुबह साढ़े छह बजे शिखर पर पहुंचे।

पीठ पर 20 किलो वजन लादकर चढ़ाई

कालानाग पर्वत पर पर्वतारोहियों का सामान बेस कैंप तक खच्चर के माध्यम से पहुंच जाता है। इसके आगे पर्वतारोहियों को स्वयं ही अपना सामान कंधों पर उठाकर ले जाना पड़ता है। बंशीलाल बताते हैं कि ऑक्सीजन, आइस एक्स, क्लाइमिंग रस्सी, खाद्य सामग्री, इसका वजन लगभग 18 से 20 किलो होता है, उसे अपनी पीठ पर लादकर ले जाना पड़ता है।

एवरेस्ट फतह करना लक्ष्य

पर्वतारोहण का शौक रखने वाले बंशीलाल का कहना है कि वे वर्ष 2020 में माउंट एवरेस्ट फतह करना उनका लक्ष्य है। इससे पहले सितंबर 2019 में वे उत्तराखंड में सतोपंत पर्वत की चढ़ाई करेंगे। इसकी ऊंचाई 7075 मीटर है।

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