कोरोना से संक्रमित हो चुके 80% मरीजों को एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने चेताया, कही बड़ी बात

नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया (AIIMS director Randeep Guleria) ने कहा कि कोरोना वायरस से ज्यादातर लोगों को हल्का संक्रमण होता है। इसके बावजूद कोविड 19 को हल्के में लेने की गलती न करें, क्योंकि कोरोना से ठीक होने के बाद भी 60 से 80 फीसद मरीजों में कुछ न कुछ परेशानी देखी जा रही है। यह परेशानी शरीर दर्द जैसी हल्की भी हो सकती है, लेकिन चिंता की बात यह है कि कुछ मरीजों में फेफड़े व दिल से संबंधित गंभीर परेशानी सामने आ रही है। वह बुधवार को नेशनल ग्रैंड राउंड-7 ऑनलाइन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने देश भर के डॉक्टरों की कोरोना के बाद की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार रहने की सलाह दी।उन्होंने कहा कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी कई मरीजों का फेफड़ा कमजोर हो रहा है। इससे उन्हें लंबे समय तक ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है। ऐसे मरीजों के फेफड़े में फाइब्रोसिस की गंभीर समस्या देखी जा रही है।
उन्होंने कहा कि कोरोना से ठीक हुए दो मरीजों के फेफड़े खराब हो गए थे, उन्हें प्रत्यारोपण कराने की सलाह दी गई है। उन्होंने कहा कि बहरहाल, हाल ही में चेन्नई में कोरोना से ठीक हुए एक मरीज को फेफड़ा प्रत्यारोपित भी किया गया है। एम्स में अब तक फेफड़ा प्रत्यारोपण नहीं हुआ है, लेकिन संस्थान ने यह सुविधा विकसित कर ली है। एम्स के पास इसका लाइसेंस भी है।
जीवन की गुणवत्ता हुई प्रभावित
एम्स के निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा कि कोरोना के कारण कई मरीज स्ट्रोक के शिकार हुए हैं। ठीक होने के बाद भी उनके जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। पिछले दिनों एम्स के डॉक्टरों ने बताया था कि कोरोना के कारण स्ट्रोक से पीड़ित 31 मरीज देखे जा चुके हैं। इसी तरह कई मरीजों में दिल की बीमारी भी देखी जा रही है।
कोरोना से ठीक हो चुके हैं तब भी सतर्क रहने की जरूरत : डॉ. रंजन कुमार
उधर, उत्तरी दिल्ली नगर निगम की टाउन हॉल डिस्पेंसरी के सीएमओ डॉ.रंजन कुमार कहते हैं कि ऐसा कोई अध्ययन अब तक सामने नहीं आया है कि एक बार जो कोरोना से संक्रमित हो गया है उसे दोबारा संक्रमण नहीं होगा। डॉ रंजन कहते हैं कि एक बार कोरोना संक्रमण से ठीक होने पर यह जरूर होता है कि व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी जरूर बढ़ जाते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको फिर से संक्रमण नहीं होगा। हो सकता है कि दो-तीन माह में फिर आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़े और फिर से संक्रमण आपको जकड़ ले। इसलिए ऐसे नागरिक जिन्हें संक्रमण हो गया है या फिर जिन्हें नहीं हुआ है, उन सभी को सतर्क रहने की जरूरत हैं।
हो सकती है ये परेशानी
ये देखने में आ रहा है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी यह संबंधित शख्स को सांस लेने में तकलीफ पैदा कर सकता है। इसका असर गले के आसपास देखने को मिलता है।
यह सांस की नली और फेफड़ों को भी परेशानी में ला सकता है, क्योंकि यहां ये एक तरह की कोरोना वायरस फैक्ट्रियां बनाता है। इससे लोगों को दिक्कत पेश आती हैं।






