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गिलोय की बेलें बनी ‘वीआईपी’, सुरक्षा में तैनात किए ‘दरबान’, कोरोना काल में अचानक से बढ़ी पूछपरख

बिलासपुर। गिलोय Giloy (Tinospora Cordifolia) के एंटी-ऑक्सीडेंट और रोग प्रतिरोधी होने के कारण कोरोना काल में इसकी मांग तेजी से बढ़ी है। मांग भी ऐसी कि लोग दूसरों के घरों से चोरी छिपे गिलोय तोड़कर ले जा रहे हैं। बिलासपुर में गिलोय की लगातार चोरी से परेशान लोगों ने सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगा दिए हैं। साथ ही सूचना भी लिख रहे हैं कि बिना अनुमति के गिलोय न तोड़ें। जूना बिलासपुर निवासी सुनीता सिंह ने बताया कि सुबह वॉक के लिए निकलने वाले गिलोय तोड़ लेते हैं। लगातार गिलोय की चोरी से परेशान होकर उन्होंने सीसीटीवी कैमरा लगवाया है।

बड़ी संख्‍या में गि‍लोय तोड़ने पहुंच रहे लोग

सरकंडा निवासी विकास मिश्रा का कहना है कि सुबह से ही बड़ी संख्या में गिलोय के लिए लोग पहुंने लगते हैं। चुपचाप तोड़कर ले जाते हैं। इससे कई बेल सूख जाती हैं। उसके औषधीय गुण को देखते हुए बार-बार लगाना पड़ता है। अब तो शहर में गिलोय का पौधा भी आसानी से नहीं मिल रहा है। इससे वे सुबह से उसकी सुरक्षा के लिए खड़े हो जाते हैं।

ऑनलाइन हो रही बिक्री

छत्‍तीसगढ़ में गिलोय ऑनलाइन भी मिल रही है। गिलोय की छह-छह इंच की 16 डंडियों का बंडल 199 रुपये में उपलब्ध है जबकि गिलोय का पौधा 399 रुपये में मिल रहा है।

गिलोय के औषधीय गुण

एंटी-ऑक्सीडेंट के साथ ही गिलोय में ग्लूकोसाइड, टीनोस्पोरिन, पामेरिन व टीनोस्पोरिक एसिड पाया जाता है और ये कॉपर, आयरन, फास्फोरस, जिंक, कैल्शियम और मैगनीज का अच्छा स्रोत है। इसके पत्तों से लेकर तना तक काम आता है। कई सारी बीमारियों में लाभकारी है। आयुर्वेद में इसे अमृता कहा जाता है।

इन बीमारियों में मिलता है लाभ

जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ. प्रदीप शुक्ला का कहना है कि गिलोय रासायनिक औषधि है। यह हर बीमारी में कारगर होती है। चार इंच गिलोय के तने के साथ दालचीनी व अन्य उपयोगी औषधियों के साथ काढ़ा बनाकर पीने से मधुमेह, डेंगू, मलेरिया, बुखार में फायदा मिलता है। पीलिया, कब्ज, गाठिया जैसे कई रोगों में आराम मिलता है। गिलोय खांसी, वात, पित्त और कफ को भी नियंत्रित करती है। रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाता है। खांसी, कफ और बुखार जैसे कुछ लक्षण कोरोना में भी हैं। इस वजह से गिलोय कोरोना से निजात पाने में भी सहायक साबित होता है।

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