ब्रेकिंग
Jantar Mantar Protest: दिल्ली में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ MCIM का बड़ा प्रदर्शन, कई सांसद होंगे श... BJP News: 'सार्वजनिक जीवन में रखें शुचिता', पार्टी नेताओं को महंगे तोहफों से बचने की सलाह; चुनावी रा... Hyderabad Crime: मणिकोंडा के फ्लोटिला अपार्टमेंट में 'चड्डी गैंग' का धावा, महिला पर हमला कर लाखों की... Mumbai Illegal Construction: मुंबई में 14 फीट से ऊपर बने मकानों पर घमासान, कांग्रेस और शिवसेना UBT न... Kanpur Flood News: पांडु नदी के उफान में फंसा गर्भवती महिला का परिवार, 25 मिनट में NDRF ने किया सुरक... UP Politics: यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों का सियासी गणित, 8 वोटों की खातिर क्या फिर होगी क्रॉस वोटि... Agra News: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक घर पर कांग्रेस का हंगामा, दीवार पर पोती कालिख; ... Traffic Challan Recovery: नहीं भरा ट्रैफिक चालान तो कट जाएगी बिजली! सुप्रीम कोर्ट का बिजली बिल से जो... Barapullah Phase 3 Inauguration: दिल्ली को मिली बड़ी सौगात, अमित शाह कल करेंगे बारापुला फेज-3 का उद्... UP Crime News: फतेहपुर के मलवां कस्बे में भीषण सिलेंडर विस्फोट, मकान मलबे में तब्दील; सीएमओ ने की 4 ...
देश

Make In India में उत्तर प्रदेश की बड़ी उड़ान, हरदोई के संडीला में बनेगी इंग्लैंड की मशहूर वेब्ले स्काॅट रिवॉल्वर

लखनऊ। लड्डू के लिए प्रसिद्ध संडीला की पहचान में नया सितारा जुड़ने जा रहा है। भारत सरकार के प्रयासों से अब इंग्लैंड की मशहूर रिवाल्वर वेब्ले स्कॉट का उत्पादन उत्तर प्रदेश में हरदोई जिले के संडीला में होने जा रहा है। लखनऊ से करीब 30 किलोमीटर दूर संडीला के इंडस्ट्रीयल एरिया के फेज-दो में यह शस्त्र निर्माण फैक्ट्री बनेगी। वेब्ले 35 साल बाद देश में दोबारा हाथियार लांच करने जा रही है। देश में हथियार निर्माण करने वाली यह पहली विदेशी कंपनी होगी। वेल्बे स्कॉट एंड स्कॉट ने आर्म्स कंपनी स्याल ग्रुप के साथ करार कर मेक इन इंडिया मुहिम को आगे बढ़ाने का काम किया है।

उत्तर प्रदेश के हरदोई में ब्रिटेन की जानी-मानी हथियार बनाने वाली कंपनी वेल्बे एंड स्कॉट रिवॉल्वर का उत्पादन करने जा रही है। यह भारत में फायर आर्म्स बनाने वाली पहली विदेशी कंपनी होगी। हैंडगन बनाने की दिग्गज कंपनी ने परियोजना के लिए कानपुर-लखनऊ की आर्म्स कंपनी स्याल मैन्युफैक्चरर्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ हाथ मिलाया है। कंपनी नई यूनिट के पहले चरण में अपने .32 रिवाल्वर का निर्माण करेगी। यूके कंपनी की यहां बारूद, पिस्तौल, एयरगन और रिवाल्वर बनाने की भी योजना है।

वेब्ले बनाने वाली देश की पहली इकाई : आर्म्स कंपनी स्याल ग्रुप के निदेशक सुरेंद्र पाल सिंह उर्फ रिंकू ने बताया कि नवंबर 2020 तक वेब्ले स्कॉट की पहली खेप मार्केट में आ जाएगी। इसके लिए सारी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। पश्चिम बंगाल के ईसानगर में 29 से 30 सितंबर के बीच टेस्टिंग के लिए भेजी जा रही है। टेस्टिंग में हरी झंडी मिलने के बाद नवंबर में वेब्ले भारतीय मार्केट में आ जाएगी। उन्होंने बताया कि इंग्लैंड की मशहूर कंपनी वेब्ले 35 साल बाद भारत में दोबारा हाथियार लांच करने जा रही है। स्याल मैन्यूफैक्चर प्राइवेट लिमिटेड को ग्रह मंत्रालय से लाइसेंस मिल चुका है। यह वेब्ले बनाने वाली देश की पहली इकाई होगी।

वेब्ले की इनहाउस मैन्यूफैक्चरिंग : सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि करार के मुताबिक 49 फीसद शेयर वेब्ले के और 51 फीसद हिस्सेदारी स्याल ग्रुप के पास है। रिसर्च एंड डवलपमेंट और टेक्नोलॉजी वेब्ले की होगी। यहां पर गौर करने वाली बात यह होगी कि वेब्ले की इनहाउस मैन्यूफैक्चरिंग होगी। यानी यहां असेम्बलिंग नहीं बल्कि इसका एक-एक पार्ट संडीला स्थित फैक्ट्री में बनाया जाएगा। नवंबर में लांच होने वाली वेब्ले पिस्टल की मारक क्षमता 40-50 मीटर है। 1887 से 1963 तक वेब्ले स्कॉट का इस्तेमाल की अनुमति केवल ब्रिटेन की शाही सेना, सरक्षा और कॉमनवेल्थ सदस्यों को थी।

देश के लिए गर्व की बात : सुरेंद्र पाल सिंह का कहना है यह हमारे व देश के लिए गर्व की बात है। नामी कंपनी का उत्पाद हम अपने ही देश में बना रहे है। जिस पर भारत की मुहर मेक इन इंडिया लिखा होगा। इससे बड़ी बात स्याल ग्रुप के लिए और क्या हो सकती है। वह बताते है कि 55 वर्ष पूर्व स्याल मैन्यूफैक्चरर्स ग्रुप का उदय कानपुर ओर लखनऊ में हुआ था। वहीं आज ग्रुप की चौदह आर्म्स फर्म्स है, हथियारों का ऐसा कौन शौकीन है, जो इस ग्रुप को नहीं जानता है। अभी तक रिवाल्वर और पिस्टल में कोई विकल्प नहीं है, दुनिया का सबसे पुराना और नाम ब्रांड वेब्ले के भारतीय बाजार में आने से हथियार बाजार को सबसे उन्नत ओर शानदार विकल्प मिलेगा।

.32 रिवॉल्वर की लागत 1.6 लाख रुपये : डब्ल्यूएंडएस उत्पादों के ऑल इंडिया डिस्ट्रीब्यूटर्स सियाल मैन्युफैक्चरर्स के जोगिंदर पाल सिंह सियाल ने कहा कि सरकार के सहयोग और केंद्र की ‘मेक इन इंडिया’ नीति ने परियोजना को अंतिम रूप देने में मदद की। उन्होंने कहा कि .32 रिवॉल्वर की लागत 1.6 लाख रुपये होगी। हम आयुध कारखानों की ओर से बनाए गए हथियारों को कड़ी टक्कर देंगे। लोगों को अब उनके दरवाजे पर विश्व स्तरीय हथियार मिलेंगे।

Related Articles

Back to top button