ब्रेकिंग
West Bengal Railway News: बंगाल को मिलेगी पहली बुलेट ट्रेन; सिलीगुड़ी से दिल्ली का सफर होगा अब आसान Dehradun Polytechnic News: परीक्षा में नकल रोकने पर शिक्षकों के साथ मारपीट; पॉलिटेक्निक में शिक्षकों... CJP Protest Delhi: 'कॉकरोच न डरते हैं, न मरते हैं...' जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने भरी हुंकार; धर्मे... Delhi Hotel Fire Case: दिल्ली अग्निकांड में रसोइया गिरफ्तार; लापरवाही और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन प... Jharkhand Politics: राज्यसभा चुनाव में एनडीए एकजुट; गौरव वल्लभ का नाम लगभग तय, सरयू राय ने दिए संकेत Giridih News: पिपराडीह ओवरब्रिज के पास कारों और बाइक की टक्कर; एक ही परिवार के दो सदस्यों ने तोड़ा दम Ranchi Crime News: होमगार्ड जवान से लूट और चाकूबाजी का खुलासा; पुलिस ने दो अपराधियों को दबोचा Muzaffarpur Hospital Fire: प्रसाद अस्पताल का लाइसेंस रद्द; लापरवाही से हुई 6 मरीजों की मौत पर प्रशास... Varanasi News: शंकराचार्य के विद्यामठ आश्रम में चोरी का खुलासा; मुख्य आरोपी राजू खान सहित 3 गिरफ्तार Jabalpur Crime News: जबलपुर में नशीले इंजेक्शन का बड़ा खेल बेनकाब; 2 MR समेत 6 गिरफ्तार, 15 लाख का मा...
देश

फेक न्यूज पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से कहा इस पर रोक लगाने के लिए तंत्र विकसित करने

नई दिल्ली। कोरोना महामारी की शुरुआत में तब्लीगी जमात के कार्यक्रम पर मीडिया रिपोर्टिग को लेकर केंद्र सरकार की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को नाखुशी जताई। कोर्ट ने कहा कि सरकार को टीवी पर इस तरह के मामलों को नियंत्रित करने के लिए एक नियामक तंत्र स्थापित करने पर विचार करना चाहिए। साथ ही उससे यह पूछा है कि इस मुद्दे पर उसने केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट (सीटीएनए) के तहत क्या कार्रवाई की है।साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने फेक न्यूज पर रोक लगाने के लिए तंत्र विकसित करने के बारे में पूछा। प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ‘पहले तो आपने कोई हलफनामा नहीं दायर किया। हलफनामा दायर भी किया तो उसमें दो अहम मुद्दों पर कुछ नहीं कहा गया है। इस तरह से नहीं चल सकता।’

अदालत ने सरकार से नया हलफनामा दायर कर सीटीएनए के तहत की गई कार्रवाई और ऐसे मामलों से निपटने के लिए मौजूदा कानून के बारे में बताने को कहा है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने अपने हलफनामा में कहा है कि इस मामले में ज्यादातर मीडिया ने तथ्यों पर आधारित रिपोर्टिग की है।

पीठ में जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम भी शामिल थे। पीठ ने मेहता से कहा, ‘हम आपके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। हम चाहते हैं कि आप हमें बताएं कि सीटीएनए के तहत आपकी तरफ से क्या कार्रवाई की गई है।’ इस पर मेहता ने कहा कि इसके तहत कई कदम उठाए गए हैं। शीर्ष अदालत जमीयत उलेमा–ए–हिंद की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया है कि मीडिया के एक धड़े ने कार्यक्रम को लेकर गलत रिपोर्टिग की और समाज में नफरत फैलाने का काम किया।

परीक्षा शुल्क माफ करने की मांग वाली याचिका खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कोरोना महामारी के मद्देनजर 10वीं और 12वीं के छात्रों के परीक्षा शुल्क माफ करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका में इसके लिए केंद्रीय माध्यमिक परीक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और दिल्ली सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। यह भी कहा गया था कि कोरोना के चलते ज्यादातर अभिभावकों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना प़़ड रहा है।

जस्टिस अशोक भूषषण, जस्टिस आर सुभाषष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कहा, ‘अदालत सरकार को ऐसा करने के लिए कैसे कह सकती हैं? आप सरकार के सामने अपना पक्ष रखें।’ गैर सरकारी संगठन (सोशल जुरिस्ट) ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार और सीबीएसई से कहा था कि वह इस जनहित याचिका पर नियमों के मुताबिक विचार कर फैसला करे। 2020–21 शैक्षणिक सत्र के लिए सीबीएसई ने 10वीं के लिए 1500–1800 रपये और 12वीं के लिए 1500–2400 रपये परीक्षा शुल्क रखा है।

महामारी कानून के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इन्कार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महामारी कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने से इन्कार कर दिया। साथ ही याचिकाकर्ता (मिराशी) से यह सवाल भी किया कि उसने इस मुद्दे पर बांबे हाई कोर्ट में अपील क्यों नहीं की। अदालत ने कहा कि महामारी कानून जैसे केंद्रीय कानूनों को रद करने का हाईकोर्ट को पूरा अधिकार है और याचिकाकर्ता को पहले वहां जाना चाहिए।

Related Articles

Back to top button