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OTT कंटेंट की सेंसरशिप के ख़िलाफ़ शत्रुघ्न सिन्हा, बोले- ‘हर्ट सेंटिमेंट्स के नाम पर सेंसरशिप मज़ाक’

नई दिल्ली। वेटरन एक्टर शत्रुघ्न सिन्हा ने ओटीटी कंटेंट और प्लेटफॉर्म्स पर सेंसरशिप का विरोध करते हुए इसे फलती-फूलती इंडस्ट्री के लिए घातक बताया है। अपने ट्वीट्स के ज़रिए वरिष्ठ अभिनेता ने कहा कि भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बातों की आड़ में नैतिक आचार संहिता लागू करना ठीक नहीं।

बता दें कि देश में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर दिखाये जा रहे कंटेंट को लेकर पिछले काफ़ी वक़्त से एक बहस चल रही है। पिछले दिनों रिपोर्ट्स आयी थीं कि ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन लाया जाएगा, जिसके बाद ओटीटी कंटेंट पर सेंसरशिप होने के कयास लगाये जाने लगे।

शत्रुघ्न सिन्हा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित हुए एक लेख का हवाला देते हुए सेंसरशिप संबंधी संभावित कयासों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा- भावनाओं को ठेस पहुंचने के बहाने की आड़ में नैतिक आचार संहिता बनाने की बातें करना एक मज़ाक है। पैनडेमिक के इस मुश्किल दौर में ये ओटीटी प्लेटफॉर्म्स ही थे, जो जीवित रहे और घर पहल रहते हुए हमें इसका सामना करने में मदद की और तनाव रहित किया। अंधविश्वास और मज़हब का भय दिखाकर कला और रचनाशीलता को ख़त्म करने का यह घटिया तरीका है। यह एक फलता-फूलता उद्योग है, जिसका भविष्य उज्ज्वल है। इसे चंद सतही और विकृत सोच रखने वालों के लिए मार डालना क्या उचित है? गंभीरता से सोचिए। जय हिंद।

ओटीटी पर दिखाये जा रहे कंटेंट को लेकर अक्सर विवाद सामने आते रहे हैं। ताज़ा मामला अ सूटेबल बॉय का है, जिसके कुछ दृश्यों को लेकर सोशल मीडिया से वास्तविक जीवन तक बवाल मचा हुआ है। मामला पुलिस और अदालत तक पहुंच चुका है। इससे पहले अक्षय कुमार की फ़िल्म लक्ष्मी के शीर्षक को लेकर सोशल मीडिया में ख़ूब हंगामा हुआ था। इस फ़िल्म के टाइटल में लक्ष्मी के साथ बम लगाने पर धार्मिक कारणों से इसका विरोध किया गया। आख़िरकार, मेकर्स को फ़िल्म रिलीज़ से पहले टाइटल बदलना पड़ा था।

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