ब्रेकिंग
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में वर्चस्व की लड़ाई तेज, असली संगठन बताने को लेकर आमने-सामने आए दोनों गुट LADC नीति के विरोध में गर्माया वकीलों का आंदोलन, 27 जुलाई को लुधियाना कोर्ट परिसर में 89 अधिवक्ता बै... महिला इंस्पेक्टर से दुष्कर्म के आरोपी SI साहिबमीत सिंह पर बड़ा खुलासा, दादा और पिता भी रह चुके हैं प... मानसा में 17 वर्षीय नाबालिग लड़की से गैंगरेप, परिजनों की शिकायत पर 5 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज बरनाला लाठीचार्ज के विरोध में 27 जुलाई को 'पंजाब बंद' का ऐलान, जालंधर में वाल्मीकि समाज का बड़ा फैसल... श्री माता वैष्णो देवी यात्रा पर उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब, जयकारों के साथ भवन की ओर बढ़े भक्त पंजाब में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल जारी, बिजली मंत्री के साथ 6 घंटे की मीटिंग रही पूरी तरह बेनतीज... मालिक की फोटो लगाकर 2.50 करोड़ की साइबर ठगी, लुधियाना पुलिस ने जोधपुर से आरोपी को किया गिरफ्तार लुधियाना के फेस-5 फोकल पॉइंट में अज्ञात युवक का शव मिलने से फैली सनसनी, मौके पर पहुंची पुलिस लुधियाना के 100 फुटी रोड पर युवक पर जानलेवा हमला, बातचीत के बहाने बुलाकर तेजधार हथियारों से किया लहू...
देश

देश की उन्नति के लिए बालिकाओं को कुछ कर दिखाने का मौका देना चाहिए: मोहन भागवत

मथुरा: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि महिलाएं स्वभाव से ही वात्सल्य देने वाली होती हैं, इसीलिए वे समाज का भी काम पुरुषों से ज्यादा अच्छा करती हैं। संघ प्रमुख यहां वृन्दावन के केशवधाम में नवस्थापित रामकली देवी बालिका सरस्वती विद्या मंदिर के लोकार्पण अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा, ‘‘मनुष्य का सबसे पहली शिक्षक उसकी मां होती है। माता से ही उसकी शिक्षा शुरु होती है और शिक्षा के कारण ही उसका स्वभाव एवं प्रवृत्ति बनती है। माता के दिए संस्कार ही उसके जीवन का आधार बनते हैं। इसलिए बालिका शिक्षा का महत्व और अधिक है। हमारे देश के संविधान ने भी पुरुष और स्त्री को समान अधिकार दिए हैं। लेकिन कुछ परंपराओं के नाम पर कुछ बातों ने आज भी हमारे समाज को जकड़ रखा है जिनसे मुक्त कराना बेहद जरूरी है।”

बालिका शिक्षा के महत्व पर भागवत ने कहा, ‘‘‘यह बहुत ही अच्छी बात है कि सरकार ने नई शिक्षा नीति तैयार की है। इस विद्यालय में उसका बहुत ही अच्छा प्रभाव दिखाई देगा।” संघ प्रमुख ने विदेशी शिक्षा पद्धति के मुकाबले देशज शिक्षा का महत्व समझाने के लिए महात्मा गांधी की गोलमेज सम्मेलन के लिए की गई इंग्लैण्ड यात्रा का वर्णन किया। उन्होंने कहा, ‘‘असल में अंग्रेजों ने खुद तो हमारी शिक्षा पद्धति से ज्ञान लिया लेकिन हमारे यहां ऐसी शिक्षा पद्धति थोप दी गई जिससे शिक्षा पाकर साक्षरता मात्र 17 प्रतिशत पर ही अटकी रही थी। लेकिन भारतीय शिक्षा पद्धति से 70 प्रतिशत तक पहुंच गई।”

Related Articles

Back to top button