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किसानों के समर्थन में पूर्व नौकरशाहों का पत्र, लिखा- यदि सरकार चाहती है समाधान तो वापस ले कानून

नई दिल्ली। केंद्र द्वारा पारित तीन कृषि कानूनों को रद कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानों के प्रति सरकार का रवैया शुरू से ही प्रतिकूल व टकराव वाला रहा है। शुक्रवार को यह बात पूर्व नौकरशाहों (Civil Servants)  के एक ग्रुप ने अपने पत्र में लिखा। इस पत्र पर 75 पूर्व नौकरशाहों के हस्ताक्षर हैं जिसमें नजीब जंग (Najeeb Jung), जुलियो रिबेरियो (Julio Riberio) और अरुणा रॉय (Aruna Roy) भी शामिल हैं। ये संवैधानिक आचरण समूह का हिस्सा (Constitutional Conduct Group, CCG) भी हैं।  पत्र में कहा गया कि गैर-राजनीतिक किसानों के साथ ऐसे व्यवहार किया जा रहा है जैसे एक गैरजिम्मेदार विपक्ष को उनके राह से हटाना, गिराना और पराजित करना हो।

इसके अलावा पत्र में यह भी कहा गया है कि ‘बार-बार असफल, क्षेत्रीय, सांप्रदायिक और अन्य लोगों के साथ आंदोलन का ध्रुवीकरण करने का प्रयास निंदनीय है। इस तरीके से समाधान नहीं मिलेगा। यदि भारत सरकार वास्तव में एक सौहार्दपूर्ण समाधान चाहती है तो डेढ़ साल तक कृषि कानूनों को रोक कर  रखने जैसे आधे-अधूरे कदमों का प्रस्ताव करने के बजाय, यह कानूनों को वापस ले सकती है और अन्य संभावित समाधानों के बारे में सोच सकती है।’

पत्र में आगे लिखा है, ‘CCG में शामिल हम लोगों ने 11 दिसंबर, 2020 को एक बयान जारी कर किसानों को समर्थन देने पर विचार किया। उसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसने हमारे इस विचार को और मजबूत बनाया कि किसानों के साथ अन्याय हुआ है और लगातार हो रहा है।’  पूर्व नौकरशाहों  ने इस मुद्दे पर भारत सरकार से सुधारात्मक कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि वे 26 जनवरी 2021 को गणतंत्र दिवस पर हुए घटनाक्रम से विशेष रूप से चिंतित थे जिसमें उस दिन हुए गतिरोध का दोष किसानों पर डालने का प्रयास किया गया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि कुछ पत्रकारों और एक विरोधी पार्टी के संसद सदस्य के खिलाफ खाली उनके ट्वीट्स को लेकर खिलाफ देशद्रोह के आरोप क्यों लगाए गए हैं जबकि अभी तक तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट नहीं है।

बता दें कि प्रदर्शन कर रहे किसानों ने 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली निकाली लेकिन कुछ किसानों ने निर्धारित मार्गों के बजाय लाल किला चले गए और वहां धार्मिक झंडे लहराए। पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के हजारों किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। इस पत्र पर पूर्व आइएएस अधिकारी जावहर सरकार और अरबिंदो बेहरा के अलावा पूर्व IFS अधिकारी केबी फाबियान और आफताब सेठ, पूर्व आइपीएस एके समाता (AK Samata)  शामिल हैं।

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