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एक साल में जितने डाक्‍टर और पैरा मेडिकल स्‍टाफ हुए रिटायर, संविदा नियुक्ति से बुलाएं वापस

रायपुर। डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए एक साल के भीतर रिटायर लोगों को संविदा नियुक्ति देने की मांग की गई है। छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य चेतना विकास समिति एवं छत्तीसगढ़ राज्य संयुक्त पेंशनर्स फेडरेशन ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव से आग्रह किया है कि कोरोना वायरस संक्रमण के त्वरित नियंत्रण के लिए हाल ही में एक वर्ष के भीतर सेवानिवृत्त हुए डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को संविदा नियुक्ति देकर स्टाफ की कमी को दूर करने का सुझव दिया है।

प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र नामदेव का कहना है कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस जनित महामारी कोरोना-19 का प्रकोप लगातार तेजी से बढ़ रहा है और इन स्थितियों में एलोपैथी, होम्योपैथी, आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के सरकारी अस्पतालों में सभी डॉक्टर और पैरा मेडिकल स्टाफ पूरी कर्तव्य निष्ठा और ईमानदारी के साथ कोरोना योद्धा के रूप में सेवायें दे रहे हैं।

परन्तु विभाग इस विकट परिस्थितियों में चिकित्सकों और पैरा मेडिकल स्टाफ की कमी होने की विकट समस्या से जूझ रहा हैं। इस कमी से निपटने के लिए सरकार को सेवानिवृत्त होने वाले कोरोना योद्धाओं को तुरंत एक वर्ष सेवावृद्धि देकर और हाल ही में एक वर्ष भीतर सेवानिवृत्त हुए लोगो को संविदा नियुक्ति देकर इस समस्या से कुछ हद तक निजात पाया जा सकता है।

मिली जानकारी अनुसार अनेक सेवानिवृत्त चिकित्सक स्वयं होकर पुनः सेवा के लिए इछुक है और स्वयं आवेदन देकर काम मे वापस लौटने निवेदन भी किया है। इनके आवेदन सरकारी तामझाम में उलझे पड़े हैं, सरकार को ऐसे आवेदन पर तत्काल निर्णय लेने की जरूरत है।

उन्होंने कहा है कि शासन को तत्काल स्टाफ की कमी को दूर करने सेवानिवृत्त स्वास्थ्य कर्मचारियों एवं चिकित्‍सकों को अपना आवेदन निकटस्थ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी में प्रस्तुत कर कोरोना वायरस के नियंत्रण कार्य मे लग जाने का उनसे आव्हान करना चाहिए।

उन्होंने आगे बताया है कि कुछ राज्यों में गत वर्ष इसी तरह के आदेश जारी किये थे, जिसे आवश्यकता अनुसार समीक्षा कर आगे भी बढ़ा रहे हैं और स्टाफ कमी समस्या से दूर हैं। अतः छत्तीसगढ़ सरकार को जनहित में तुरंत निर्णय लेना चाहिए।

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