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लाकडाउन बढ़ाने का फैसला

रायपुर।  प्रदेश के ग्यारह जिलों में लाकडाउन की अवधि एक बार फिर पांच मई तक के लिए बढ़ा दी गई है। अन्य सत्रह जिलों में भी लाकडाउन चल रहा है तथा स्पष्ट संकेत है कि समय सीमा समाप्त होने के पहले वहां भी अवधि बढ़ा दी जाएगी। इस तरह कोरोना का विस्तार रोकने के लिए प्रदेश के सभी 28 जिलों में लाकडाउन के अंतिम विकल्प का ही प्रयोग करना पड़ रहा है।

यह बहुत जटिल और गंभीर स्थिति है तथा समस्या का अंत नजर नहीं आ रहा। प्रतिदिन कोरोना के नए मामलों की संख्या और मौतों का आंकड़ा ठहरने का नाम नहीं ले रहा। अभी भी बीमारी की चपेट में आने वालों की संख्या ठीक होने वालों की तुलना में कहीं ज्यादा है। इससे स्पष्ट हो रहा है कि अस्पतालों और चिकित्सा व्यवस्था पर दबाव बढ़ने का सिलसिला जारी है तथा समस्या विस्फोटक स्थिति की तरफ बढ़ रही है।

सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल बार-बार बता रहे हैं कि वह लाकडाउन लगाए जाने के पक्ष में नहीं हैं। स्पष्टत: लाकडाउन कोरोना से संघर्ष में विफलता और विकल्पहीनता के कारण मजबूरी में लिया गया फैसला है। इससे उबरने के लिए जरूरी है कि सभी लोगों का चौतरफा सहयोग मिले। कोरोना की दूसरी लहर में जनता का लापरवाह व्यवहार मुख्य कारण रहा।

बाजारों में अनावश्यक भीड़ ने वायरस के अनियंत्रित विस्तार का माध्यम तैयार किया और अब सभी को घरों में दुबकने को मजबूर होना पड़ रहा है। कोई तय कर पाने की स्थिति में नहीं है कि लाकडाउन का विस्तार कब तक करते रहने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। अस्पतालों में बिस्तर, आक्सीजन और बाजार में दवाओं की कमी ने चुनौतियों को और विकराल बना दिया है। व्यवस्था का सहयोग करने के लिए सभी को अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करना होगा।

कोरोना को हराने के लिए इसकी चेन को तोड़ना ही एकमात्र विकल्प है। इस वायरस को हल्के में नहीं लिया जा सकता और लाकडाउन को सफल बनाकर ही सफलता पाई जा सकती है। इसके लिए आम नागरिकों का आत्म-संयम और प्रशासन का संतुलित व्यवहार बहुत जरूरी है। लोगों को उनके घरों तक सही कीमत पर भोजन सामग्री पहुंचाने में प्रशासन को मदद करनी होगी। कालाबाजारी रोकने के लिए सख्ती दिखानी होगी तो शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध भी करने होंगे।

इसके साथ ही टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित किए जाने की जरूरत है। बड़ी संख्या में लोग भ्रम फैला रहे हैं। इंटरनेट मीडिया इस कदर भ्रमित कर रहा है कि पूरी कोशिशें नाकाम हो सकती हैं। स्वास्थ्य अगर डाक्टरों का विषय है तो इस बारे में किसी को भी कुछ भी सलाह दे देने की छूट नहीं दी जा सकती। यह अभियक्ति की आजादी का मामला नहीं माना जा सकता।

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