ब्रेकिंग
PM Modi in Indonesia: 'भारत मदर ऑफ डेमोक्रेसी', इंडोनेशिया की संसद में पीएम मोदी ने पेश किया 'गंगा-म... Welcome to the Jungle Budget: 250 करोड़ नहीं, डायरेक्टर अहमद खान ने बताया फिल्म का असली बजट Ramayana Movie Rights: करण जौहर ने 250 करोड़ में खरीदे 'रामायण' के डिस्ट्रीब्यूशन राइट्स, दिवाली पर ... Prabhas Fauzi Update: प्रभास की 'फौजी' में होगा हाई-वोल्टेज एक्शन, 10 जुलाई से शुरू होगी इंटरवल सीन ... Akshay Kumar 2016 Movies: 'एयरलिफ्ट' से 'रुस्तम' तक, जब अक्षय कुमार ने 8 महीने में दी थीं लगातार 3 स... UP ATS Action: लखनऊ NIA कोर्ट का बड़ा फैसला, 13 बांग्लादेशी और 2 रोहिंग्या घुसपैठियों को 5-5 साल की ... डबरा में सफाई कर्मचारी की संदिग्ध मौत, अपहरण के शक में पुलिसकर्मियों पर पिटाई का आरोप Khajrana Civil Hospital: जमीन का नहीं हुआ हस्तांतरण, इसलिए अटका खजराना सिविल अस्पताल का काम Haridwar Mansa Devi Temple: राम मंदिर विवाद के बाद मनसा देवी ट्रस्ट सख्त, पुजारियों के लिए बनाए कड़े... Ketan Agrawal Murder Case: केतन हत्याकांड में चौंकाने वाला खुलासा, आरोपी चेतन-सिया ने 4 महीने पहले क...
खेल

Labour codes को लागू करने की तैयारी में सरकार, घटेगी कर्मचारियों की इन-हैंड सैलरी, PF में होगा इजाफा

नई दिल्ली। आने वाले कुछ महीनों में चारों श्रम संहिताएं (Labour codes) लागू हो जाने की संभावना है। केंद्र सरकार इन लेबर कोड्स को अमली जामा पहनाने की तैयारी कर रही है। इन संहिताओं के लागू होने से कर्मचारियों का इन-हैंड वेतन घट जाएगा। साथ ही कंपनियों को कर्मचारियों के पीएफ फंड में अधिक योगदान करना पड़ेगा। इन कानूनों के लागू होने से कर्मचारियों की बेसिक सैलरी, भत्तों और पीएफ योगदान की गणना में बड़ा बदलाव आएगा।

इन 4 लेबर कोड्स में वेतन/मजदूरी संहिता, औद्योगिक संबंधों पर संहिता, काम विशेष से जुड़ी सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल की दशाओं (OSH) पर संहिता और सामाजिक व व्यावसायिक सुरक्षा संहिता शामिल हैं। श्रम मंत्रालय ने पहले इन लेबर कोड्स को नए वित्त वर्ष अर्थात एक अप्रैल 2021 से लागू करने की परिकल्पना की थी। लेकिन फिर इसे टाल दिया गया, जिससे नियोक्ताओं को नए वेज कोड के अनुसार, अपने कर्मचारियों की सैलरी का पुनर्गठन करने के लिए अधिक समय मिल गया।

मंत्रालय ने इन चारों संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप भी दे दिया था। लेकिन इनका क्रियान्वयन नहीं हो सका, क्योंकि कई राज्य अपने यहां संहिताओं के तहत इन नियमों को लागू करने की स्थिति में नहीं थे। यहां बता दें कि भारत के संविधान के तहत श्रम एक समवर्ती विषय है। इसका मतलब यह है कि इन चारों संहिताओं के तहत केंद्र व राज्य दोनों को इन नियमों को अधिसूचित करना होगा, तभी संबंधित राज्यों में ये कानून प्रभावी होंगे।

न्यूज एजेंसी पीटीआइ को एक सूत्र ने बताया, ‘‘कई प्रमुख राज्यों ने इन चारों लेबर कोड्स के तहत नियमों को अंतिम रूप नहीं दिया है। कुछ राज्य इन कानूनों के क्रियान्वयन के लिए नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं। केंद्र सरकार सदैव इस बात का इंतजार नहीं कर सकती कि राज्य सरकारें इन नियमों को अंतिम रूप दें। ऐसे में केंद्र सरकार की एक-दो महीने में इन कानूनों के क्रियान्वयन की योजना है, क्योंकि कंपनियों को भी नए कानूनों से तालमेल बैठाने के लिए कुछ समय देना होगा।”

नए वेज कोड (wages code) के अंतर्गत सभी भत्ते कुल वेतन के 50 फीसद से अधिक नहीं हो सकते हैं। इससे कर्मचारी की बेसिक सैलरी कुल वेतन का 50 फीसद हो जाएगी। वहीं, कर्मचारी और कंपनी दोनों का ही पीएफ योगदान (PF Contribution) बढ़ जाएगा। साथ ही ग्रेच्युटी की रकम भी बढ़ जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि कर्मचारी की बचत बढ़ जाएगी। हालांकि, कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी घट जाएगी।

Related Articles

Back to top button