फंड की कमी से रुकी दिल की सर्जरी, पांच माह में मात्र 10 सर्जरी, 200 मरीज लौटाए

रायपुर। राज्य के सबसे बड़े सरकारी आंबेडकर अस्पताल के एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट में फंड की कमी के कारण महज पांच माह पूर्व शुरू की गई ओपन हार्ट सर्जरी बंद कर दी गई। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि 14 जनवरी को सर्जरी की सुविधा शुरू होने के बाद से 27 मार्च तक 10 लोगों की ओपन हार्ट सर्जरी की गई है। अब पिछले चार माह में 200 से अधिक मरीजों को लौटाए जा चुके हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि ओपन हार्ट सर्जरी के लिए कई उपकरण बाहर से पैसे देकर मंगाने पड़ते हैं। वेंडरों के करीब एक करोड़ रुपये बकाया होने की वजह से उन्होंने चिकित्सकीय उपकरण देना बंद कर दिया है। वहीं प्रशिक्षित निश्चेतना विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ समेत 200 कर्मियों आवश्यकता है। राशि को लेकर विभागाध्यक्ष से लेकर अस्पताल अधीक्षक से राज्य सरकार को पत्र तो लिखा।
मगर, बजट की समस्या का हवाला देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। सुविधाएं बंद होने से अब इससे दिल की बीमारी लिए गरीब मरीज वापस लौट रहे हैं। इधर, कार्डियोलाजी विभाग में भी दवाओं का संकट लंबे समय से गहराया है। अस्पताल द्वारा दवाओं की आपूर्ति नहीं होने से मरीजों से मंगानी पड़ती हैं।
सालाना साढ़े छह करोड़ का बजट, नहीं देती सरकार
चिकित्सा अधिकारियों ने बताया कि एसीआई का सालाना बजट करीब साढ़े छह करोड़ रुपये का है, जो आने वाले मरीजों के दिल, फेफड़े आदि सर्जरियों पर खर्च होता है। इसकी राशि नहीं मिलने मिलने से यहां सर्जरी का सारा कामकाज ठप पड़ता जा रहा है। ऐसे में इलाज के लिए आने वाले गरीब मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
एडवांस कार्डियक इंस्टिट्यूट के आंकड़ों पर एक नजर
1000 से अधिक दिल, फेफड़े व अन्य सर्जरियां
25 की ओपीडी कार्डियक सर्जरी में औसत हर रोज
1.49 लाख रुपये खर्च आता है ओपन हार्ट सर्जरी का
10 ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी हैं विभाग में अब तक
100 की ओपीडी कार्डियोलाजी विभाग में औसत हर दिन
10 हजार करीब मरीजों का एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी व अन्य पद्धति से इलाज
वर्जन
ओपन हार्ट सर्जरी बंद कर दी गई है। मुख्य समस्या बजट को लेकर सामने आ रही है। सरकार को हमने पत्र लिखकर समस्या से अवगत कराया है। जैसे ही राशि मिलेगी, सेवाएं शुरू कर दी जाएंगी। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें, इसके लिए हमारा प्रयास हमेशा रहता है।
– डॉ. विनीत जैन, अधीक्षक, आंबेडकर अस्पताल
वर्जन
एक ओपन हार्ट सर्जरी में करीब 90 हजार या उससे अधिक राशि का सामान लगता है। वहीं, मैनपावर व अन्य उपकरणों की समस्या के चलते सुविधा बंद करनी पड़ी है। अब तक 200 मरीज लौटे हैं। सरकार से बजट मिलने के बाद ही प्रक्रिया शुरू होगी।
– डॉ. कृष्णकांत साहू,विभागाध्यक्ष, हार्ट, चेस्ट एंड वैस्कुलर सर्जरी
वर्जन
दिल से संबंधित मरीजों के इलाज के दौरान दवाएं व अन्य उपकरण की आवश्यकता होती है, जो अस्पताल में उपलब्ध नहीं है, मरीजों से मंगाना पड़ता है। दवाओं की कमी को लेकर प्रबंधन को अवगत कराया जाता है। दवाएं पर्याप्त मिलें, तो मरीजों से बाहर से मंगाने की नौबत नहीं आएगी।
– डॉ. स्मित श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, कार्डियोलाजी विभाग






