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एडीजी जीपी सिंह ने जिनको किया ब्लैकमेल, उन्हीं की शिकायत पर हुई कार्रवाई

रायपुर।  छत्तीसगढ़ की ब्यूरोक्रेसी को हिला देने वाले एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) की एडीजी जीपी सिंह पर कार्रवाई के बाद कई राज अब खुलने लगे हैं। एसीबी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि एसीबी चीफ रहने के दौरान 1994 बैच के आइपीएस अफसर जीपी सिंह ने कई जमीन कारोबारियों, खदान मालिकों और अफसरों को फोन टैपिंग करके धमकाने का काम किया। जीपी सिंह की धमकी से परेशान और करोड़ों की संपत्ति उनके नाम पर करने वाले कारोबारियों ने ही एसीबी में शिकायत की थी। करीब 100 से ज्यादा फोन रिकार्डिंग के साथ की गई शिकायत के बाद छापे की तैयारी करीब तीन महीने पहले से शुरू कर दी गई थी

एसीबी को सिंह के खिलाफ कई लोगों ने खुफिया इनपुट दिया है। शिकायत करने वालों में ऐसे लोग भी शामिल हैं, जो सिंह के डर से अपनी प्रापर्टी उनके नाम कर चुके हैं। छापे के बाद रायपुर, भिलाई, राजनांदगांव और ओडिशा में कोरोड़ों की प्रापर्टी की पुष्टि हुई है। एसीबी के आला अधिकारियों ने बताया कि धमकी देकर कमाए पैसे को जीपी सिंह ने राजनांदगांव, रायपुर और ओडिशा के कुछ कारोबारी मित्रों के माध्यम से निवेश कराया है। इसके दस्तावेज अब तक मिले हैं।

हालांकि, यह जमीन और कारोबार में कितने करोड़ का शेयर जीपी सिंह का है, इसकी पड़ताल अब तक पूरी नहीं हुई है। जीपी की दो नंबर की कमाई का इंवेस्टमेंट और हिसाब इन्ही में से कुछ कारोबारी रखते थे। बताया जा रहा है कि जीपी खुद को कंपनी के काम में सीधे शामिल नहीं करते हैं। एसीबी के आला अधिकारियों ने बताया कि आयकर विभाग ने पिछले साल रायपुर के वीआइपी रोड पर प्रीतपाल सिंह के फार्म हाउस और एक बिल्डर के कुछ ठिकानों पर सर्वे किया था। उसी जांच में जीपी सिंह के नाम से निवेश के कुछ कागजात मिले थे, लेकिन यह जांच आगे नहीं बढ़ी।

एसीबी अफसरों को इसकी जानकारी थी। इस इनपुट से एसीबी का शक और पक्का हुआ। कांग्रेस सरकार में जीपी सिंह को एसीबी का प्रभार 28 फरवरी 2019 को सौंपा गया और एक जून 2020 को उनकी विदाई हुई। इस दौरान पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी रहे अशोक चतुर्वेदी पर कार्रवाई काफी विवादों में रही। इस विवाद में जीपी सिंह निजी तौर पर शामिल हो गए थे और दस्तावेजों से आगे जाकर एफआइआर दर्ज कराई थी। इसी तरह नान मामले में फंसे चिंतामणि चंद्राकर पर भी कार्रवाई की गई।

एमजीएम मामले में भी चिंतामणि का विवाद जीपी सिंह के समय ही आया था। निलंबित आइपीएस मुकेश गुप्ता के कार्यकाल में सुर्खियों में आई रेखा नायर का मामला भी जीपी सिंह के समय आया। कुछ समय विवाद के बाद सभी मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। बताया जाता है कि एसीबी चीफ रहने के दौरान कई रसूखदार अफसरों को छापे की सूचना लीक करने के आरोप में जीपी सिंह की एसीबी से विदाई हुई थी।

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