1977 में विरोध करने वाले ही ला रहे जनसंख्या नियंत्रण कानून- भूपेश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जनसंख्या नियंत्रण कानून के मुद्दे पर केंद्र व भाजपा की राज्य सरकारों पर निशाना साधा है। बघेल ने कहा कि 70 के दशक में कांग्रेस शासन के दौरान विपक्षी दलों ने नसबंदी कार्यक्रम का कड़ा विरोध किया था। अगर वह कार्यक्रम जारी रहता, तो आज जनसंख्या नियंत्रित रहती। रायपुर के स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर मीडिया ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से सवाल किया कि असम और उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जा रहा है।
इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यही भारतीय जनता पार्टी (तब जनसंघ) है, जब नसबंदी कार्यक्रम चला था तो इन्होंने विरोध किया था। यदि उस समय नसबंदी को आगे बढ़ाते तो आज जनसंख्या नियंत्रित रहती है। उस समय केंद्र में इंदिरा गांधी की सरकार थी, तब विपक्ष के लोगों ने इसे मुद्दा बनाया था। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि 1977 के लोकसभा चुनाव में यह विपक्ष का प्रमुख मुद्दा था।
इसकी वजह से जनसंख्या नियंत्रण का वह पूरा कार्यक्रम प्रभावित हुआ था। आज कानून बनाकर नियंत्रण की बात की जा रही है, लेकिन जब तक लोग जागरूक नहीं होंगे, तब तक कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। बहुत से परिवार हैं, जो एक या दो बच्चों का महत्व समझ रहे हैं। वे लोग भी चाहते हैं कि उनके बच्चे पढ़ें-लिखें और उनके जीवन स्तर में सुधार हो।
यह बात गरीब से गरीब आदमी भी समझ रहा है। मैं समझता हूं कि जनजागरण चलाना चाहिए, लेकिन केवल राजनीति करने के लिए कानून नहीं बनाना चाहिए। पहले भी हम दो हमारे दो जैसा नारा था। उसको आगे बढ़ाना चाहिए।
प्रदेश में कर्मचारियों के एकमुश्त तबादले पर जारी रहेगी रोक : सीएम
प्रदेश में कर्मचारियों के एकमुश्त तबादले पर लगी रोक जारी रहेगी। नागपुर रवाना होने से पहले स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट पर बुधवार को पत्रकारों से चर्चा में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि समन्वय के माध्यम से कर्मचारियों का तबादला हो रहा है। कोरोना की वजह से बड़े पैमाने पर तबादला करना उचित नहीं होगा। दरअसल, मध्य प्रदेश में तबादला नीति जारी होने के बाद मीडिया ने मुख्यमंत्री से प्रदेश में तबादले को लेकर सवाल किया था।
छत्तीसगढ़ की आखिरी तबादला नीति वर्ष 2019 में आई थी। इसमें तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के स्थानांतरण जिले के प्रभारी मंत्री के अनुमोदन से कलेक्टर कर रहे थे। कोरोना की वजह से वित्त विभाग ने पिछले वर्ष ही व्यापक तबादलों पर रोक लगाने का प्रस्ताव दिया था। कर्मचारी संगठन इस वर्ष तबादला नीति की मांग कर रहे थे।
प्रशासनिक स्तर पर चर्चा थी कि खुद के व्यय पर कर्मचारियों के स्थानांतरण को मंजूरी दी जा सकती है। कई कर्मचारी संगठन भी इस प्रस्ताव का समर्थन करने को तैयार थे। मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब इस कयास पर भी रोक लग गई है।






