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छत्तीसगढ़ : पांच हिंदू परिवारों का मतांतरण कराने का आरोप, गंगाजल पिलाकर कराई वापसी

भिलाई। छत्तीसगढ़ के जिला दुर्ग के चरोदा स्थित चर्च में रविवार को पांच हिंदू परिवारों के 20 सदस्यों का मतांतरण कराया गया। इस बीच सूचना मिलने पर हिंदू संगठन के लोग पहुंचे तो खुर्सीपार निवासी पास्टर प्रमोद पिछले दरवाजे से भाग गया। मगर मतांतरण में कथित भूमिका निभाने वाली तीन महिलाएं पकड़ी गई। इनमें से एक सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्य, दूसरी शिक्षिका और एक अन्य है। मतांतरण करने वालों को गंगाजल पिलाकर हिंदू धर्म में वापस लाया गया। पुलिस ने पकड़ी गई महिलाओं को हिरासत में लेने के बाद पूछताछ कर चेतावनी देकर छोड़ दिया है।

बता दें कि पास्टर प्रमोद चर्च के पीछे के दरवाजे से भाग निकला, लेकिन उसकी कार वहीं खड़ी थी। इस दौरान मौके से ईसाई धर्म संबंधी विभिन्न सामाग्री के साथ सरस्वती शिशु मंदिर की प्राचार्य पदमा महानंद, शिक्षिका संगीता बाघ और रीतू साहू (उरला) पकड़ी गई। तीनों महिलाओं से बड़ी संख्या में बाइबल और अन्य सामाग्री जब्त की गई, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। आरोप है कि तीनों महिलाओं ने तीन महीने पहले ही मतांतरण किया है। बता दें कि सरस्वती शिशु मंदिर को आरएसएस द्वारा संचालित किया जाता है।

कोरोना काल में दिया गया था प्रलोभन

धर्मातरित पांच परिवारों को डा. विशाल चंद्राकर ने हिंदू धर्म में वापसी कराई। पांचों परिवारों ने बताया कि लाकडाउन के दौरान यह लोग रोज आते थे। प्रलोभन देते थे तथा शांति मिलने की बात कहते थे। पीड़ित परिवारों ने कहा कि उन्हें बीते तीन चार महीने से लगातार प्रलोभन दिया जा रहा था। दूसरे धर्म में शांति और तरक्की की बात कही जा रही थी। यह भी कहा गया कि लाकडाउन में हिंदू धर्म या उनके समाज ने क्या दिया।

देवबलौदा (भिलाई चरोदा) के विरष्ट भाजपा नेता डा. विशाल चंद्राकर ने कहा, कोई भी अपने धर्म का प्रचार प्रसार कर सकता है, पर दूसरे धर्म के लोगों की गरीबी मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें मतांतरित किया जाना गलत है।

प्रभारी जीआरपी थाना चरौदा महेंद्र पांडेय ने कहा, किसी के खिलाफ कोई अपराध दर्ज नहीं किया गया है। पूरी घटना की जानकारी आई थी। पकड़ी गईं महिलाओं को हिरासत में लेकर पूछताछ के बादचेतावनी देकर छोड़ दिया गया है।

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