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राजपाट से बड़ी सम्यकत्व पाने की खुशी, जानिए कैसे पता करें कि आप किस स्तर पर हैं

रायपुर: आप किसी को भोजन देते हैं, तो उस पर एक दिन का उपकार करते हैं। कपड़े देकर कुछ दिनों का और ज्ञान देकर अगले जन्म तक उस जीव पर आपका उपकार हो जाता है। इन सबसे ऊपर हैं सम्यक के दाता, जिनका उपकार मोक्ष तक रहता है। सम्यक रूपी रत्न मिलने की खुशी दुनियाभर का राजपाट मिलने से बढ़कर है। यह संदेश विवेकानंद नगर स्थित श्री ज्ञान वल्लभ उपाश्रय में साध्वी हंसकीर्ति दिया।

साध्वीश्री ने कहा कि हमें यह नहीं देखना चाहिए कि मेरे गुरु मुझे देखें। हमारे अंदर ऐसी भावना होनी चाहिए कि मैं अपने गुरु को देखता रहूं। एक प्रसंग में बताया कि एक राजा ने अपनी पत्नी और पांच वर्ष के पुत्र को राज्य से निष्कासित कर दिया। जिस राजकुमार को महल के सुख मिलने थे, उसका बचपन अभावों में गुजरा। रानी की मृत्यु के बाद राजकुमार किसी तरह अपना गुजारा करता रहा। 20 साल बाद राजा वृद्ध हो गए और उन्हें अपनी धर्मपत्नी और बच्चे को घर से निकालने का पछतावा था।

एक दिन राजा ने आदेश दिया कि उनके पुत्र की तलाश की जाए। हाथ के निशान से पुत्र मिल गया। सोचिए, जो बालक शुरू से गरीबी में पला उसे अचानक राजपुत्र होने का पता चले, तो वह कितना खुश हुआ होगा। यही आनंद हमें सम्यक्त्व की प्राप्ति पर मिलेगा। सम्यक दर्शन का अर्थ है सच्ची श्रद्धा, सत्य तत्वों में गहरी आस्था और सही दृष्टि।

ऐसे पता करें कि आप किस स्तर पर हैं

जिनवाणी पर अटूट श्रद्धा हो, तब ही जीव को सम्यक दर्शन की प्राप्ति होती है। सम्यक दर्शन का अवतरण होना आत्मोन्नति की प्रथम सीढ़ी है। सम्यक दर्शन पद के 67 गुण हैं जिनमें 4 श्रद्धा, 3 लिंग, 10 विनय के प्रकार, 3 शुद्धि, 5 दुषण, 8 प्रभावक, 5 भूषण, 5 लक्षण, 6 जयणा, 6 आगार, 6- भावना और 6 स्थान शामिल हैं। इन 67 गुण से अपने आप की जांच सकते हैं कि हम सम्यकत्व के कितने करीब हैं।

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