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छत्तीसगढ़ सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन पर भाजपा ने साधा निशाना

रायपुर: भाजपा ने नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को लेकर सरकार के आर्थिक प्रबंधन पर निशाना साधा है। भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के संयोजक राजेश अग्रवाल, कमल गर्ग और अमित चिमनानी ने एकात्म परिसर में रविवार को आयोजित पत्रकारवार्ता में सीएजी रिपोर्ट में सरकार की गड़बड़ियों को उजागर किया। अमित चिमनानी ने कहा कि मंत्री रविंद्र चौबे सीएजी रिपोर्ट को लेकर झूठ बोल रहे हैं।
मंत्री चौबे ने कहा कि कोरोना के कारण राज्य की आय में कमी हुई, जबकि यह रिपोर्ट कोरोनाकाल से पहले की है। 36 में से 24 वादे पूरा करने का झूठा दावा करने वाली सरकार बजट में से 21 हजार 334 करोड़ रुपये खर्च नहीं कर पाई। इसमें से एक हजार 527 करोड़ रुपये लैप्स हो गए। छत्तीसगढ़ गठन के बाद पहली बार हुआ कि नौ हजार 608 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा रहा।
चिमनानी ने कहा कि राज्य के इतिहास में सबसे ज्यादा वितीय घाटा दर्ज किया है। वर्ष 2019-20 में वित्तीय घाटा 17 हजार 969 करोड़ हुआ है। एफआरबीएम एक्ट के हिसाब से यह जीएसडीपी का 3.5 फीसद से ज्यादा नहीं होना चाहिए, लेकिन यह 5.46 फीसद तक पहुंच गया है। राज्य की राजस्व आय बढ़ने की बजाय एक हजार 226 करोड़ रुपये घटी, जबकि राजस्व व्यय नौ हजार 66 करोड़ बढ़ा है, जो प्रदेश की आर्थिक बदहाली को बताने के लिए काफी है। विकास के दावे करने वाली सरकार पूंजीगत व्यय में फिसड्डी साबित हुई है। सरकार ने सात हजार 265 करोड़ रुपये का निवेश किया, जिसमें रिटर्न मात्र 0.03 फीसद रहा, जबकि कर्ज लेने पर औसत खर्च 6.83 फीसद रहा।
छत्तीसगढ़ खतरे की लाइन पार
राजेश अग्रवाल ने कहा कि राज्य ने ब्याज के तौर पर हजारों करोड़ का भुगतान किया, वही सरकार के पास कैश बैलेंस 11 हजार 396 करोड़ है। इसका मतलब यह निकाला जा सकता है कि आपके घर में पैसे हैं, लेकिन आप बैंक से लोन लेकर ब्याज जमा करके दिवालिया होने की इच्छा रखते हैं। अधूरे काम अधूरे रहने से उनकी लागत बदने से नुकसान बढ़ा है। अग्रवाल ने कहा कि किसी भी राज्य के लिए चिंता का विषय देनदारियां हैं। अब छत्तीसगढ़ के खतरे की लाइन पार हो चुकी है।






