ब्रेकिंग
₹200 जुर्माने वाले मामले में 12 साल की देरी: मंडी कोर्ट ने पुलिस का चालान किया खारिज, आरोपी बरी कानपुर के नत्थापुरवा गांव में गिरा 4-सीटर ट्विन-इंजन विमान; ट्रेनर सचिन भाटिया और ट्रेनी अभिषेक की म... राहुल गांधी के दबाव में बैकफुट पर मोदी सरकार? कांग्रेस जनता के बीच ले जाएगी ये 5 बड़े मुद्दे, प्रचार... धमतरी: 10 साल से बिस्तर पर जिंदगी काट रहे शशिकांत ने मांगी इच्छामृत्यु; हमले की CBI जांच और इलाज की ... उत्तर प्रदेश सर्किल रेट लिस्ट 2026: 9 साल बाद बदलने जा रहे हैं प्रॉपर्टी के सरकारी रेट, जेवर एयरपोर्... झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: असिस्टेंट पब्लिक प्रॉसिक्यूटर परीक्षा पर रोक से इनकार, सरकार से 2 हफ्... गोरखपुर में पति-पत्नी के झगड़े से 1000 घरों की बिजली गुल: गुस्से में 11 KV हाईटेंशन तार पर फेंके कपड... कोटा में फिर NEET छात्रा ने की खुदकुशी: फ्लैट में फंदे से लटकी मिली खुशबू पटेल, छतरपुर से आकर कर रही... अंकित बालियान मर्डर केस में बड़ा खुलासा: सोनीपत में मिल रही थी रंगदारी व जान से मारने की धमकी, 7 मही... 'पढ़ेगा इंडिया' के दावों की खुली पोल: प्रतापगढ़ में पेड़ के तने के सहारे नाला पार करने को मजबूर मासू...
देश

विश्व का प्रथम आदि शिवलिंग है मंडलेश्वर के गुप्तेश्वर मंदिर में

मंडलेश्वर। कसरावद मार्ग पर नगर का सबसे प्राचीन शिवालय गुप्तेश्वर महादेव सनातन काल से विराजमान है। गुप्तेश्वर महादेव प्राचीन गुफा मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है। इतिहासकार दुर्गेश राजदीप ने बताया कि पुराणों में उल्लेख है कि एक ऋषि के श्राप के कारण एक शिव पिंडी यहां गिरी थी, जिसे देवी पार्वती ने संभाला था। यही शिव पिंडी गुप्तेश्वर महादेव के रूप में विराजित है। इसे विश्व का प्रथम आदि शिवलिंग भी कहा जाता है

विशेषता : यहां शिवलिंग पर नर्मदा की धारा निरंतर गिरती रहती थी। कालांतर में जमीन के अंदर होने वाले परिवर्तन के चलते यह नर्मदा की धारा बंद हो गई। गुप्तेश्वर मंदिर आदिगुरु शंकराचार्य के परकाया प्रवेश के कारण चर्चा में आया। इसका उल्लेख स्वयं आदिगुरु ने अपने ग्रंथ शंकर दिग्विजय में किया। उल्लेखनीय है कि आदिगुरु शंकराचार्य व मंडन मिश्र का शास्त्रार्थ गुप्तेश्वर मंदिर परिसर में हुआ था। जब मंडन मिश्र इस शास्त्रार्थ में हार गए थे तब उनकी पत्नी विदुषी भारतीदेवी ने शंकराचार्य को शास्त्रार्थ की चुनौती दी।

बाल्यकाल से ब्रह्मचारी आदिगुरु, भारती देवी के काम आधारित प्रश्नों का उत्तर नहीं दे पाए। तब उन्होंने भारती देवी से छह माह का समय मांगा। योग विद्या के बल पर परकाया प्रवेश किया। तब उनकी स्थूल देह को गुप्तेश्वर मंदिर में सुरक्षित रखा गया। आदिगुरु ने अयोध्या के तत्कालीन राजा अमरक के देह में प्रवेश कर गृहस्थ जीवन व काम संबंधी ज्ञान लेकर भारती देवी के प्रश्नों के उत्तर जाने। छह माह पश्चात अपनी देह से सजीव होकर भारती देवी के प्रश्नों का उत्तर दिया।

Related Articles

Back to top button