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जिले में गोठानों की बदलेगी तस्वीर, यह काम करेंगे कलेक्टर

बिलासपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अति महत्वाकांक्षी योजना में से एक नरवा,गस्र्वा,घुस्र्वा व बाड़ी योजना में गोठान को लेकर एक बार फिर राज्य शासन ने फोकस करना शुरू कर दिया है। प्रदेशभर के कलेक्टरों को पत्र लिखकर जिले के अंतर्गत आने वाले हर एक विकासखंड में एक-एक गोठानों को गोद लेने का निर्देश जारी किया है। गोद लेने के बाद विकसित करना है।

स्वयंसेवी संस्थाओं के महिलाओं को आर्थिक रूप से समृद्ध करने के अलावा काम भी देना है। शासन के इस आदेश से स्वयंसेवी संस्थाओं की महिलाओं की भूमिका एक बार फिर प्रभावी होते नजर आ रही है। राज्य शासन ने गोठान विकास को लेकर एक बार फिर फोकस करना शुरू कर दिया है। गोबर की खरीदी के बाद महिला समूहांे द्वारा जैविक खाद का निर्माण के अलावा गोबर से अन्य उत्पाद का निर्माण किया जा रहा है। परिसर में नेपियर घास का उत्पादन भी किया जा रहा है।

ग्रामीण आर्थिक समृद्धि का एक बड़ा जरिया के रूप में गोठानों को विकसित करने की योजना सरकार की है। इसी योजना को आगे बढ़ाते हुए अब जिले के कलेक्टरों को जिले के अंतर्गत आने वाले विकासखंड के एक-एक गोठान को गोद लेकर विकसित करने का निर्देश दिया है। मतलब साफ है कि प्रत्येक विकासखंड में एक आदर्श गोठान होगा। आदर्श गोठानों में होने वाले कामकाज को आसपास के ग्रामीण व गोठान समिति के सदस्य सीखंेगे और उस पर अमल करने की कोशिश करेंगे।

योजना में ये शामिल

0 मल्टीएक्टिविटी सेंटर की स्थाना होगाी।

0 ओपन शेड बनाए जाएंगे। समूहों की गतिविधियों को आसानी के साथ संचालित की जा सकेगी।

0 स्व सहायता समूहांे द्वारा निर्मित वर्मी कंपोस्ट की बिक्री की व्यवस्था शासन स्तर पर की जाएगी।

0 गोठानों में चारागाह विकास करना अनिवार्य है।

0 गोबर खरीदी का कार्य किया जाना हैै।

0 हितग्राहियों को उनके बैंक खाते में राशि का भुगतान किया जाना है।

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