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वन्य प्राणी प्रबंधन व सुरक्षा व्यवस्था संभालने में परिपक्व होने एटीआर के 37 वनकर्मी गए कान्हा

बिलासपुर। कान्हा टाइगर रिजर्व की वन्य प्राणी प्रबंधन और बाघों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे उपायों से अवगत कराने के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व से 37 अधिकारी व वन कर्मियों को भेजा गया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस प्रशिक्षण से लौटने के बाद टाइगर रिजर्व प्रबंधन अन्य वनकर्मियों को भी भेजगा। कान्हा टाइगर रिजर्व का प्रबंधन काफी बेहतर है। यही वजह है कि अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने वनकर्मियों को वहां भेजकर प्रशिक्षण लेने का निर्णय लिया। इसके लिए पहले वन्य प्राणी प्रधान मुख्य वनसंरक्षक से अनुमति मांगी गई। जब उन्होंने सहमति दी। उसके बाद कान्हा टाइगर रिजर्व प्रबंधन से बात की गई और वनकर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए राजी किया गया।

इसके बाद ही दो रेंजर, फारेस्टर को मिलाकर करीब 25 पैदल गार्ड को भेजा गया है। यह दल मंगलवार को कान्हा पहुंचा। बुधवार से प्रशिक्षण भी शुरू हो गया है। वनकर्मी वहां जंगल व वन्य प्राणियों की सुरक्षा के गुर सीखेंगे। इसके अलावा बाघों की संख्या कैसे बढ़ेगी इस पर वनकर्मियों को कान्हा के अधिकारी विस्तार से जानकारी देंगे। अचानकमार टाइगर रिजर्व प्रबंधन का मानना है कि इस तरह के प्रशिक्षण से अमला परिपक्व होता है।

उनकी कार्यशैली में काफी सुधार आता है। प्रशिक्षण कर लौटने के बाद वे इसी तरह काम करेंगे। उनका यह भी मानना है कि किसी भी टाइगर रिजर्व का सबसे महत्वपूर्ण मैदानी कर्मचारी होते हैं। जब तक वह परिपक्व नहीं रहेंगे व्यवस्था में सुधार नहीं आने वाली। टाइगर रिजर्व में करीब 130 पैदल गार्ड है। इनमें से 25 को ही भेजा गया है। बारी- बारी इतनी की संख्या में अन्य वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

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