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बाहर उमड़े किसान, अंदर चल रही प्रशासन के बीच बैठक

करनाल। करनाल लाठीचार्ज मामले में किसान और प्रशासन के बीच दो बजे वार्ता शुरू हो गई है। किसान नेताओं और उपायुक्त निशांत यादव की बातचीत शुरू हो गई है। किसानों की ओर से राकेश टिकैत, कामरेड इंद्रजीत अजय राणा, योगेंद्र यादव, गुरनाम सिंह चढ़ूनी सहित कई किसान नेता बैठक में मौजूद हैं। किसान नेताओं की मांग है कि तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा को बर्खास्त कर उन पर जांच चलाई जाए।

वहीं, किसान नेताओं के आह्वान के बाद लघु सचिवालय के बाहर आंदोलनकारियों की भीड़ बढ़ती जा रही है। सुरक्षा बल भी पूरी तरह से मुस्‍तैद है। लोगों की सुरक्षा का पूरा पुख्‍ता इंतजाम किया गया हैै।

जाट भवन में किसान नेताओं ने मंथन किया। इसके बाद प्रेस से बातचीत की। किसान नेता राकेश टिकैत ने बताया कि प्रशासन ने दो बजे बातचीत के लिए बुलाया है। प्रशासन की बात सुनेंगे। आखिर प्रशासन किसानों की बात पर मानती है या नहीं। अब एक नई परंपरा का आगाज होगा। अब अधिकारी आकर फैसला खुद सुनाएंगे। जो भी बातचीत होगी, उसकी जानकारी अधिकारी देंगे

  • करनाल के जिला सचिवालय के बाहर आंदोलनकारी डटे हैं। किसानों के तेवर जस के तस हैं। उन्होंने रात यहीं खुले में बिताने के बाद सुबह ही टेंट लगाने शुरू कर दिए। दिन में धूप से बचाव के लिए टैंट की व्‍यवस्‍था की जा रही है। सुबह के नाश्‍ते और लंगर की व्यवस्था भी की गई। करनाल के जाट भवन के पास आखिरकार किसानों के विरोध को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेड्स हटा दिए। अब यह रास्ता खोल दिया गया।
  • लघु सचिवालय में लगातार आंदोलनकारियों की संख्‍या कम होती जा रही है। मंगलवार को जहां तीन से चार हजार आंदोलनकारी पहुंचे थे। वहीं, सुबह महज तीन से चार सौ आंदोलनकारी बचे। ऐसे में सेक्टर 12 में धरना स्थल पर किसान नेता आह्वान कर रहे हैं कि अपने अपने गांव से अधिक से अधिक संख्या में किसानों को बुलाया जाए। जबकि लघु सचिवालय के मुख्य गेट को किसान खोलने की इजाजत नहीं दे रहे हैं। इसके चलते सचिवालय के गेट नंबर 3 से ही अधिकारी आ जा रहे हैं। सचिवालय में इस समय उपायुक्त निशांत यादव व एसपी गंगाराम पूनिया सहित कई अधिकारी अपने कार्यालय में है। दूसरी ओर धरना स्थल की साफ-सफाई और अस्थाई शौचालयों का प्रबंध नगर निगम की ओर से करवाया गया है।
  • वहीं, करनाल के सेक्टर 12 के जाट धर्मशाला के पास पुलिस में नाकाबंदी करके हाईवे का रास्ता बंद किया हुआ है। यह रास्ता बंद होने से बंद होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि किसानों को भी धरना स्थल तक पहुंचने के लिए यह रास्ता बंद होने की वजह से वजीर चंद कलोनी के बीच में से आना पड़ रहा है। रास्ता खुलवाने के लिए कई किसान नाकेबंदी की ओर चल दिए हैं। ऐसे में टकराव की स्थिति हो सकती है।
  • किसान नेता राकेश टिकैत, योगेंद्र यादव मीडिया के सामने आए। बुधवार को मीडिया के सामने आए किसान नेता योगेंद्र यादव ने कहा कि शासन प्रशासन को अब किसानों के हौसले और तेवर देखकर कुछ समझ आ गई होगी लेकिन यदि अब भी ऐसा नहीं होता तो किसान कतई पीछे नहीं हटेंगे।
  • टिकैत ने कहा, यहां जो भी नेता रहेगा, उसी की अगुवाई में आंदोलन आगे बढ़ेगा। मैं और अन्य नेता भी आते-जाते रहेंगे। टिकैत ने स्पष्ट किया कि जहां तक जिला सचिवालय में अधिकारियों या कर्मचारियों के प्रवेश की बात है तो किसान इससे नहीं रोकेंगे। अलबत्ता, प्रशासन इसका ठीकरा हमारे सिर फोड़ना चाहता है तो अलग बात है।

बता दें कि महापंचायत में तीन कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे किसान संगठनों से जुड़े आंदोलनकारी नेता सरकार के खिलाफ जमकर बरसे। कई घंटे तक चले हाई वोल्टेज घटनाक्रम में केंद्र और प्रदेश सरकार पर तीखे शब्दों में प्रहार किया गया। इसी बीच चरम पर पहुंचे तनाव व बेहद संवेदनशील हालात के बीच जब प्रशासनिक अधिकारियों से तीन दौर की वार्ता बेनतीजा रही तो महापंचायत के मंच से जिला सचिवालय कूच का एलान कर दिया गया।

टिकैत और गुरनाम सिंह चढ़ूनी की अगुवाई में पहुंचे आंदोलनकारी

शाम करीब सात बजे भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत और भाकियू (चढ़ूनी) के अध्यक्ष गुरनाम चढ़ूनी की अगुवाई में आंदोलनकारी जिला सचिवालय के गेट के आगे ही बैठ गए। बीते दिनों हुए बसताड़ा प्रकरण में लाठीचार्ज को लेकर लगातार आंदोलनकारियों के निशाने पर रहे करनाल के तत्कालीन एसडीएम आयुष सिन्हा पर सख्त कार्रवाई सहित अपनी अन्य मांगों को लेकर मंगलवार को नई अनाज मंडी परिसर में किसान सुबह से ही जुटना शुरू हो गए थे।

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