ब्रेकिंग
ILBS का 'लिवर मिशन': दिल्ली मॉडल से होगा हर नागरिक का फ्री चेकअप, सरकार ने खोला मदद का पिटारा कंगना रनौत की बढ़ी मुश्किलें: किसान आंदोलन पर टिप्पणी मामले में कल बठिंडा कोर्ट में होंगी पेश मराठी कार्ड पर छिड़ा घमासान! भाजपा अध्यक्ष बोले- भाषा के नाम पर जहर न घोलें, वोटिंग से पहले सियासी प... मिसाइल से लेकर माइंडसेट तक... सेना प्रमुख ने समझाया क्या है 'शौर्य संप्रवाह', दुश्मनों के लिए बजाई ख... सावधान! उत्तर भारत में जारी है 'कोल्ड वेव' का कहर; रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी, जानें मौसम विभाग की नई चे... प्रयागराज माघ मेला: श्रद्धालुओं के बीच मची चीख-पुकार, दूसरे दिन भी भड़की आग; आखिर कहाँ है सुरक्षा इं... तनाव के बीच तेहरान से आया राहत भरा मैसेज: 'टेंशन मत लेना...', जानें ईरान में फंसे भारतीय छात्रों का ... शमशान से घर पहुंचने से पहले ही उजड़ गया परिवार! सीकर में भीषण हादसा, एक साथ उठीं 6 अर्थियां राणा बलचौरिया मर्डर केस में SSP मोहाली के बड़े खुलासे, गिरफ्तार शूटरों ने बताए चौंकाने वाले सच घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बीच खुले पंजाब के स्कूल, अभिभावकों ने उठाई छुट्टियां बढ़ाने की मांग
देश

कृषि विश्वविद्यालय में मत्स्य पालन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण शुरू

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित कृषि विज्ञान केंद्र, रायपुर द्वारा राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड के वित्तीय सहयोग से ‘‘बायोफ्लाक एवं सेमी बायोफ्लाक तकनीक द्वारा मत्स्य पालन‘‘ विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो चुका है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 25 सितंबर तक किया जाएगा। कार्यक्रम का शुभारंभ डा. डी. रविंद्र महाप्रबंधक, नाबार्ड क्षेत्रीय कार्यलय, रायपुर के मुख्य आतिथ्य में खाद्य प्रौद्योगिकी महाविद्यालय, रायपुर के सभाकक्ष में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की अध्यक्षता इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार सेवाएं डा. एस.सी. मुखर्जी ने की। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ राज्य के लगभग 45 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ शासन की महत्वांकाक्षी योजना नरुआ, गुरूवा, घुरवा, बाड़ी के अंतर्गत इस तकनीक का समावेश किया जा सकता है क्योंकि बायोफ्लाक एवं सेमि बायोफ्लाक तकनीक के मध्यम से किसानों के बाड़ी में केवल चार मीटर के व्यास में मछली पालन किया जा सकता है

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. डी. रविंद्र ने प्रशिक्षणार्थियों से कहा की कोरोना महामारी काल के दौरान केवल कृषि क्षेत्र ही निरंतर कार्यरत था। किसान अपने प्रक्षेत्रों में बायोफ्लाक एवं सेमी बायोफ्लाक तकनीक से मछली पालन कर अधिक आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों से कहा कि मछली उत्पादन के लिए वे नाबार्ड की योजनाओं से भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डा. एस.सी. मुखर्जी ने कहा कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने बायोफ्लाक एवं सेमी बायोफ्लाक तकनीक से मत्स्य पालन करने में देश में और देश के बाहर सफलता हासिल की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन करना एक महत्वपूर्ण कार्य है और इस क्षेत्र में कृषि विज्ञान केंद्र, रायपुर द्वारा किये जा रहे कार्यों की उन्होंने सराहना की

विदित हो की कृषि विज्ञान केंद्र, रायपुर द्वारा पूर्व में भी इस प्रकार के नौ प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया जा चुका है जिसमें देश के 13 राज्यों के साथ-साथ बांगलादेश, नेपाल एवं म्यांमार के कुल 325 प्रतिभागियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है और उनमें से कुछ प्रतिभागियों ने अपना स्वरोजगार स्थापित कर लिया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रभारी डा. सौगत सास्मल हैं। कार्यक्रम की रूपरेखा कृषि विज्ञान केंद्र, रायपुर के प्रमुख डा. गौतम राय द्वारा प्रस्तुत की गई।

Related Articles

Back to top button