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जिलाधिकारियों का सम्मेलन, जानिए सीएम बघेल ने ली क्लास में क्या सिखाए सबक

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिलाधिकारियों के कार्यों की समीक्षा के दौरान प्रशासनिक धर्म का पाठ पढ़ाते हुए स्पष्ट किया कि राज्य में आर्थिक गतिविधियों के संचालन के साथ कानून और व्यवस्था का बेहतर प्रबंधन भी आवश्यक है। इसके लिए प्रशासन को सजगता दिखाते हुए जिम्मेदारी संभालनी होगी। जिले का मुखिया होने के नाते जनता को संतुष्ट रखना कलेक्टर का ही कर्तव्य है। सरकार की ओर से लिए गए निर्णयों और नीतियों को धरातल तक पहुंचाने का काम उन्हीं का है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार और प्रशासन, दोनों के केंद्र में जनता होनी चाहिए। कोरोना संकट के समय इसी भावना के अनुरूप कार्य किए गए, जिसके परिणामस्वरूप राज्य में हुए विकास कार्यों और महामारी नियंत्रण के उपायों से जनता में सरकार के प्रति विश्वास और प्रशासन के लिए सम्मान बढ़ा। राज्य के मुखिया ने अधिकारियों से संवाद में उन्हें अच्छा करने के लिए प्रेरित करते हुए अनैतिक कार्यों से पूरी व्यवस्था को बचाने के लिए प्रेरित करता रहा।

निगरानी और स्थितियों पर नियंत्रण के लिए तंत्र के विकास पर मुख्यमंत्री का जोर रहा, ताकि इंटरनेट मीडिया के जरिए भ्रामक प्रचारों के कारण तनावपूर्ण परिस्थितियों को रोका जाए। जिम्मेदार कारकों को समय रहते नाकाम करने की जवाबदेही जिलाधिकारियों पर ही है। हाल के दिनों में प्रदेश में तनाव बढ़ाने में इंटरनेट मीडिया की बड़ी भूमिका रही, जिससे प्रदेश के शांतिप्रिय लोगों की छवि भी प्रभावित हुई। काफी समय तक नक्सल प्रभावित होने के कारण बहुत नुकसान उठाना पड़ा है।

बहुत मुश्किल से शांति की स्थितियां बहाल हो रही हैं। ऐसे में मादक पदार्थों के तस्करों को फलने-फूलने का मौका नहीं दिया जा सकता। हत्या, लूटपाट, चाकूबाजी आदि घटनाओं में वास्तविक वृद्घि से ज्यादा दुष्प्रचार छवि प्रभावित कर रहा है। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार को दृढ़ता से प्रयास करने होंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य के इसी रूप को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। डिजिटल छत्तीसगढ़ के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता है और इससे उत्पन्न चुनौतियों के प्रति संवेदनशीलता भी जरूरी है।

इंटरनेट मीडिया अवसरों के साथ ही चुनौतियां भी लेकर आया है। प्रशासन को इससे निपटने के लिए खुद को तैयार करते हुए प्रभावी योजना पर काम करना होगा। सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने व्यवहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया कि उन्हें आंकड़े नहीं, लोगों की संतुष्टि चाहिए। लोगों के जीवन में नीतियों और योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ दिखना चाहिए।

आने वाले समय में ऐसी बैठकों में पंचायत प्रतिनिधियों के शामिल होने की योजना इसे और प्रभावी तथा प्रासंगिक बनाने में कारगर होगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार ने जिस लोककेंद्रित, शांतिप्रिय और नेतृत्वकर्ता छत्तीसगढ़ की परिकल्पना की है, उसको प्रशासनिक अधिकारी किस स्तर तक कार्यान्वित करने में सफल हो पाते हैं।

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