पौने दो साल बाद कलेक्टोरेट परिसर में फरियादी आएंगे नजर, कलेक्टर व आला अधिकारी सुनेंगे समस्याएं

बिलासपुर। पौने दो साल बाद मंगलवार से एक बार पिफर प्रदेशभर के कलेक्टोरेट परिसर में लोगों की भीड जुटेगी। हाथों में अर्जी लिए ग्रामीण और शहरी नजर आएंगे। राज्य शासन ने प्रदेशभर के कलेक्टरों को एक आदेश जारी कर प्रत्येक मंगलवार को कलेक्टोरेट परिसर मेें जन चौपाल लगाने का निर्देश दिया है। शासन के निर्देश के मद्देनजर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है।
प्रत्येक मंगलवार को कलेक्टर डा सारांश मित्तर समय सीमा की बैठक लेते हैं। इसमें पूर्व के दिशा निर्देशों की प्रगति रिपोर्ट का अध्ययन करते हैं और केंद्र व राज्य शासन की फ्लैगशीप योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर विभागवार समीक्षा भी करते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग से जारी निर्देश के तहत अब समय सीमा की बैठक के तुरंत बाद जन चौपाल कार्यक्रम होगा। इसमें जिले के ग्रामीण इलाकों के अलावा निकायों से आने वाले लोगों की समस्याओं का निराकरण किया जाएगा। जन चौपाल कार्यक्रम के जरिए लोगों की समस्याओं का अधिकारी निराकरण व निदान करेंगे
दोपहर एक बजे से शुरू होगा जन चौपाल
समय सीमा की बैठक के बाद दोपहर एक बजे से जन चौपाल कार्यक्रम शुरू होगा। ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण करेंगे। समय सीमा की बैठक में विभिन्न् विभागों के अधिकारी उपस्थित रहते हैं। बैठक के बाद जन चौपाल मेें आने वाले ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण् करेंगे। कलेक्टर डा मित्तर विभागवार अधिकारियों को समस्याओं के निराकरण का निर्देश देंगे।
शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता
वर्ष 2023 में छत्तीसगढ में विधानसभा चुनाव होना है। कोरोना की पहली और दूसरी लहर के कारण पौने दो साल प्रशासनिक अमले की ग्रामीणों व शहरवासियों से सीधेतौर पर संपर्क हो पाया है और न ही ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर कलेक्टोेरेट पहुंच पाए हैं। प्रशासनिक अमलों का ग्रामीणों से सीधेतौर पर संवाद नहीं हो पा रहा है। राज्य शासन ने अब इस ओर ध्यान देना शुरू कर दिया है। पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने जनदर्शन नाम दिया था। इसे बदलकर अब जन चौपाल कर दिया है। नए नाम के साथ शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन से लेकर हितग्राहियों को योजनाओं से सीधेतौर पर जोडने की कोशिश होगी।






