ब्रेकिंग
पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी के 100वें जन्मदिन पर पीएम मोदी ने लिखा खास लेख, देश के लिए दि... दिल्ली में एकतरफा प्यार और प्रताड़ना का खौफनाक अंत, पेट्रोल छिड़ककर की खुदकुशी— पुलिस जांच में जुटी पालतू कुत्ते और पार्किंग के विवाद ने ली जान, टेक कंपनी के पूर्व अधिकारी पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं बालिचंद्रपुर में दर्दनाक अग्निकांड, एलपीजी गैस से खाना बनाते वक्त हुआ हादसा— एक झुलसा यूपी-उत्तराखंड में सक्रिय अवैध ड्रग्स सिंडिकेट का भंडाफोड़, मुरादाबाद पुलिस ने 2000 कोडीन सिरप की बो... सेवा का कभी प्रदर्शन नहीं होना चाहिए, निस्वार्थ भाव से किया गया कार्य ही सच्चा धर्म है— मोहन भागवत दीपावली 2026 पर अपनों को भेजें ये खूबसूरत शुभकामनाएं और संदेश, इन प्यारे कोट्स से बनाएं त्योहार को ख... देश भर में दिवाली पर कैसा रहेगा मौसम? दिल्ली में प्रदूषण और दक्षिण भारत में भारी बारिश का अनुमान— IM... इजराइल की राजनीति में बड़ा उलटफेर, राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने विपक्षी नेता आइसेनकोट को सौंपा सरकार बन... द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मनाया गया दीपावली का पावन ...
देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट बोला, कानून का इस्तेमाल सार्थक व बेहतरी के लिए हो

प्रयागराज । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय़ में कहा है कि अपराध कानून को गणित की तरह लागू नहीं किया जा सकता। कानून का इस्तेमाल सार्थक व बेहतरी के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने विजातीय नाबालिग लड़की से शादी करने के मामले में लीक से हटते हुए पॉक्सो एक्ट के तहत आरोपी युवक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। साथ ही अपने नवजात बच्चे के साथ राजकीय बाल गृह खुल्दाबाद में रह रही लड़की को भी उसके पति (याची) के साथ जाने देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने लड़के पर कठोर शर्तें लगाई हैं कि वह 5 लाख रुपये का बैंक ड्राफ्ट लड़की और उसके बच्चे के पक्ष में कोर्ट के समक्ष जमा करेगा।
कोर्ट ने कहा कठोर पॉक्सो कानून नाबालिग लड़की को यौनाचार के अपराध से संरक्षण देने के लिए जरूरी है। अपराध भले ही गंभीर है लेकिन इसे सार्थक ढंग से लागू किया जाना चाहिए। जस्टिस राहुल चतुर्वेदी की एकलपीठ ने फतेहपुर खागा के अतुल मिश्र की जमानत अर्जी को विशेष स्थिति में स्वीकार करते हुए यह अहम आदेश दिया है। मुकदमे के विचारण में पूरी तरह सहयोग करेगा। ऐसा न करने पर विचारण न्यायालय उसकी जमानत निरस्त करने और उसके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। कोर्ट ने दो किशोरों द्वारा सामाजिक बंधनों को तोड़कर प्रेम विवाह करने और उसके बाद मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज किए जाने को देखते हुए इस प्रकरण को विशेष परिस्थिति का मानते हुए यह आदेश सुनाया।
कोर्ट ने समस्त परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए टिप्पणी की कि मौजूदा हालात में किशोरों की शारीरिक सामाजिक जरूरतों को समझने की आवश्यकता है। जहां अभिभावक अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करने में असफल रहते हैं, वहां किशोरों पर उनकी नासमझी का दोष दिया जाता है। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिकी दर्ज करा देने से अभिभावकों की असफलता से उत्पन्न समस्या का समाधान नहीं हो सकता।

Related Articles

Back to top button