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मध्यप्रदेश

मंदसौर जिला जेल में दुष्कर्म के आरोपित ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में लिखा- मुझे झूठा फंसाया

मंदसौर।   मंदसौर जिला जेल में सजा काट रहे दुष्‍कर्म के एक आरोपित ने आत्‍महत्‍या कर ली। वह जनवरी से ही जिला जेल में आया था। सुबह जेल में बेसुध मिलने पर उसे जिला अस्पताल लाया गया। जहां उपचार के दौरान कैदी की मौत हो गई। उसके जेब से एक सुसाइड नोट भी मिला है जिसमें उसने लिखा था कि मुझे झूठा फंसाया गया है। लड़की पक्ष के लोग सात लाख रुपये मांग रहे हैं, मामला वापस लेने के लिए। इतने रुपये कहां से दूं, इसलिए मौत को चुन रहा हूं।

जिला जेल अधीक्षक पीके राणा ने बताया कि जेल में सजा काट रहे 20 वर्षीय धर्मेंद्र पुत्र लक्ष्मीनारायण निवासी अजयपुर तहसील सुवासरा ने आत्महत्या कर ली है। इसकी जेब से सुसाइड नोट भी मिला है। मृतक को भानपुरा थाने में दर्ज दुष्‍कर्म के मामले में दस साल की सजा हुई थी। तब यह गरोठ जेल में था। इसके अलावा एक मामला झालावाड़ में भी दुष्‍कर्म व पाक्‍सो एक्‍ट का भी है। भानपुरा थाने में दर्ज दुष्‍कर्म के मामले में धर्मेंद्र को 10 साल की सजा हुई थी। वह गरोठ जेल से 29 जनवरी से मंदसौर जेल में भेजा गया था। शनिवार सुबह 9:30 बजे सूचना मिली थी कि धर्मेंद्र को मिर्गी का दौरा आया था उसके बाद वह नहीं उठा। उसे देखने भी गए तब वह जेल के अंदर बनी डिस्‍पेंसरी में ही था। उसकी तलाशी लेने पर जेब से सुसाइड नोट मिला तो उसके बाद जेल प्रशासन ने उसे ततकाल जिला अस्पताल भिजवाया। जहां थोड़ी देर उपचार के बाद उसकी मौत हो गई। अब कौनसा पदार्थ या दवाईयां खाकर आत्‍महत्‍या की हैं उसका पता विसरा रिपोर्ट मिलने के बाद ही चलेगा।

कौन मांग रहा था सात लाख रुपये यह नहीं लिखा

कैदी की जेब से मिले सुसाइड नोट में लिखा था कि मुझे झूठा फंसाया गया, लड़की के घरवाले आरोप वापस लेने के लिए सात लाख रुपये मांग रहे हैं कहां से दूं इसलिए मौत को चुना।

पिता कर रहे थे जमानत के लिए प्रयास

मृतक के पिता लक्ष्‍मीनारायण अहीरवार ने बताया कि बेटा बार-बार बोल रहा था कि जल्‍दी से जल्‍दी बाहर निकालो। हम उसकी इंदौर हाईकोर्ट से जमानत के लिए प्रयास कर रहे थे। मंदसौर जेल में आए उसे दो माह ही हुए थे। दो दिन पहले भी जेल में फोन किया था तो बताया था कि अब फोन मत करना इसे रिमांड पर ले रहे हैं। उसने जहर खाकर आत्‍महत्‍या की है या फिर नशीली गोलियां खाकर हमे कुछ भी नहीं बताया गया है। मामा प्रभुलाल ने बताया कि हम तो कलेक्‍टर, एसपी से मांग करते हैं कि अगर जेल में जहर खाया है या नशीली गोलिया भी खाई है तो उसकी जांच होना चाहिएं कि जेल में यह चीजे कैसे आई। इसकी निष्‍पक्ष जांच होना चाहिए।

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