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बाबूलाल को भाजपा में एंट्री के पहले सुलझाने होंगे ये पेंच, विलय की राह में आंतरिक कलह के रोड़े

रांची। Babulal Marandi Joins BJP झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी की भाजपा में वापसी तय मानी जा रही है, लेकिन इससे पहले बाबूलाल को अपनी पार्टी की आंतरिक उलझनों से पार पाना होगा। बाबूलाल के विदेश में रहने और उनके सहयोगी प्रदीप यादव के मीडिया में आ रहे बयानों से उनकी पार्टी के भाजपा में विलय को लेकर कोई बहुत अधिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में भाजपा के लिए उन्हें शामिल कराना सहज नहीं होगा। भाजपा में बाबूलाल की एंट्री तभी होगी जब वे अपनी आंतरिक उलझनों से पार पा ले, भले ही इस प्रक्रिया में विलंब हो।

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के तौर पर 20 जनवरी को कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की ताजपोशी की तारीख तय हुई है। ऐसी स्थिति में यदि एक-दो दिनों में बाबूलाल अपनी पार्टी के आंतरिक कलह को शांत कर सर्वमान्य हल नहीं निकाल सके तो उनकी भाजपा में शामिल होने की तारीख आगे खिसक सकती है। अध्यक्ष होने के बावजूद बाबूलाल को भाजपा में अपनी पार्टी के विलय के लिए अपने साथी विधायकों का मुंह देखना पड़ रहा है। विधायक बंधु तिर्की का रुख उनके फैसले को लेकर अडिय़ल है यह सभी जानते हैं, वहीं प्रदीप यादव भी अपना रुख बहुतअधिक स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।

तीन के फेर में उलझे बाबूलाल

झाविमो प्रमुख बाबूलाल मरांडी तीन के फेर में फंस गए हैं। विधानसभा चुनाव उनकी पार्टी को तीन सीटें हासिल हुई हैं उलझन की वजह यही है। पार्टी के दो मजबूत विधायक प्रदीप यादव और बंधु तिर्की की राय फिलहाल उनकी राय से इतर दिखाई दे रही है। इनमें से किसी एक विधायक का साथ बाबूलाल को चाहिए ही नहीं तो उन्हें दलबदल जैसी पेचीदगी से जूझना पड़ सकता है। मुश्किल यही है। अब इस मुश्किल का तोड़ वे कैसे निकालेंगे, सभी की निगाहें इस पर लगी हुईं हैं। धुंध अब बाबूलाल की वापसी के साथ ही साफ होगी।

आज आएंगे बाबूलाल, अटकलों पर लगेगा विरामझाविमो में चर्चाओं का बाजार गर्म

झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी आज देर शाम तक रांची लौट सकते हैं। इसके साथ ही झाविमो के भाजपा में विलय को लेकर लगभग एक पखवाड़े से जारी अटकलों पर विराम लग सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगर वास्तव में विलय जैसी कोई बात है और उसे लेकर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ झाविमो की क्या खिचड़ी पक रही है, बाबूलाल के सिवा पार्टी का कोई और शीर्ष नेता कुछ भी बता पाने की स्थिति में नहीं है।

अलबत्ता, पार्टी विलय की दिशा में आगे बढ़ रही है, झाविमो विधायक दल के नेता प्रदीप यादव स्वीकारते हैं। पार्टी के एक अन्य विधायक बंधु तिर्की का भी मानना है कि अगर धुआं है तो कहीं न कहीं विलय की आग भी है। बहरहाल झाविमो के विलय की बात और उसके अस्तित्व को लेकर पार्टी के भीतरखाने चर्चाओं का बाजार गर्म है। बताते चलें कि पिछले पांच जनवरी को झाविमो की कार्यसमिति भंग हो चुकी है और पार्टी ने 16 जनवरी तक इसके पुनर्गठन की घोषणा कर रखी है। अब पार्टी का विलय होगा अथवा नए सिरे से कार्यसमिति बनेगी, कार्यकर्ता असमंजस में हैं।

फिलहाल इस पूरे प्रकरण में बाबूलाल मरांडी की चुप्पी से ऊहापोह बरकरार है। बाबूलाल के मौजूदा स्टैंड पर प्रदीप यादव ने दो टूक कहा कि बाबूलाल की बातें बाबूलाल ही जानें। वे 25 सितंबर को पार्टी के निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए हैं। पार्टी के संविधान के अनुसार  कार्यसमिति भंग करना गलत है। अलबत्ता अध्यक्ष पार्टी का पुनर्गठन जरूर कर सकते है। बाबूलाल की इस चुप्पी पर मांडर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के विधायक बंधु तिर्की भी नाराज हैं। वे स्पष्ट कहते हैं, झाविमो सुप्रीमो को इस पूरे प्रकरण पर अपना स्टैंड साफ करना चाहिए।

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