JKPSC Judiciary Result Controversy: कश्मीर से केवल 13 उम्मीदवार होने पर मचा बवाल, अल्ताफ बुखारी ने चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल

जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विसेज (ज्यूडिशियल) मेन परीक्षा का रिजल्ट सामने आ चुका है. इसके साथ ही एक और विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है. इस परीक्षा में शॉर्टलिस्ट किए गए 124 उम्मीदवारों में से केवल 13 कैंडिडेट्स कश्मीर रीजन के रहने वाले हैं. यही वजह है कि अब तमाम राजनीतिक दल और अभ्यर्थियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
छात्रों और राजनीतिक दलों की तरफ से लगाए जा रहे आरोपों पर जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग (JKPSC) का बयान भी सामने आया है. इसमें हेरफेर के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि परीक्षा पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप कराई गई है.
JKPSC आयोग ने कहा- गड़बड़ी का सवाल ही नहीं
JKPSC आयोग ने बयान में कहा कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह मेरिट आधारित है और इसमें धर्म, क्षेत्र, भाषा या किसी अन्य आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता है. JKPSC के अनुसार आंसर शीट की जांच गोपनीय तरीके से की जाती है. इसके साथ ही परीक्षकों को उम्मीदवारों की पहचान की जानकारी नहीं होती है. यही वजह है कि इसमें किसी तरह की गड़बड़ी का कोई सवाल ही नहीं उठता है.
अल्ताफ बुखारी ने उठाए कई सवाल
इससे पहले अपनी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अल्ताफ बुखारी ने परीक्षा परिणामों पर चिंता जताते हुए कहा था कि 124 में से 111 उम्मीदवारों का जम्मू डिवीजन से होना गंभीर सवाल खड़े करता है. कश्मीर के कई छात्रों ने परीक्षा परिणामों में अनियमितताओं और पारदर्शिता की कमी की शिकायत की है.
बुखारी ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से हस्तक्षेप करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि लोगों को यकीन दिलाना चाहता हूं कि उनके लिए कोई आवाज नहीं उठाएगा. हम सबके लिए आवाज उठाएंगे.
जम्मू कश्मीर में हाल के दिनों में वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में दाखिले को लेकर भी जम्मू-कश्मीर के बीच क्षेत्रीय असंतुलन का विवाद सामने आया था, जिसके बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है. यही वजह है कि कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं.






